अयोध्या(जिला संवाददाता) सुरेंद्र कुमार। राम नगरी अयोध्या की इस पावन धरती पर अयोध्या शहर से 15 किलोमीटर दूर दतौली धाम सरकार के महाराज ओम नारायण दास ने चैतराम नवमी पर मानव कल्याण के लिए 9 दिन का अनुष्ठान कार्य कर रहे हैं जो मानव के कल्याण और समाज में फैली हुई कुरीतियों को दूर करने के लिए अपना संघर्ष जारी किए हुए हैं, दतौली धाम पर प्रदेश के कोने-कोने से लोग आते हैं और उनकी कृपा के पात्र होते हैं। इन्होंने अपने गुरु जी को वचन दिया कि मानव सेवा निःशुल्क एवं निस्वार्थ रूप से करते रहेंगे। ओम नारायण दास महाराज चैत्र रामनवमी के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दी।रामनवमी का त्यौहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी मनाया जाता है। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था।रामनवमी के त्यौहार का महत्व हिंदु धर्म सभ्यता में महत्वपूर्ण रहा है। इस पर्व के साथ ही माँ दुर्गा के नवरात्रों का समापन भी होता है। हिन्दू धर्म में रामनवमी के दिन पूजा अर्चना की जाती है। रामनवमी की पूजा में पहले देवताओं पर जल, रोली और लेपन चढ़ाया जाता है, इसके बाद मूर्तियों पर मुट्ठी भरके चावल चढ़ाये जाते हैं। पूजा के बाद आरती की जाती है। कुछ लोग इस दिन व्रत भी रखते है।लेकिन क्या आप जानते हैं कि राम नवमी का इतिहास क्या है?
महाकाव्य रामायण के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ की तीन पत्नियाँ थीं लेकिन बहुत समय तक कोई भी राजा दशरथ को संतान का सुख नहीं दे पायी थी। जिससे राजा दशरथ बहुत परेशान रहते थे। पुत्र प्राप्ति के लिए राजा दशरथ को ऋषि वशिष्ठ ने पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराने को विचार दिया। इसके पश्चात् राजा दशरथ ने अपने जमाई, महर्षि ऋष्यश्रृंग से यज्ञ कराया। तत्पश्चात यज्ञकुंड से एक दिव्य पुरुष अपने हाथों में खीर की कटोरी लेकर बाहर निकले।यज्ञ समाप्ति के बाद महर्षि ऋष्यश्रृंग ने दशरथ की तीनों पत्नियों को एक-एक कटोरी खीर खाने को दी। खीर खाने के कुछ महीनों बाद ही तीनों रानियाँ गर्भवती हो गयीं। ठीक 9 महीनों बाद राजा दशरथ की सबसे बड़ी रानी कौशल्या ने राम को जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार थे, कैकयी ने भरत को और सुमित्रा ने जुड़वा बच्चों लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया। भगवान राम का जन्म धरती पर दुष्ट प्राणियों को संघार करने के लिए हुआ था।

