रामकथा के द्वारपाल है हनुमान जी – हरिओम तिवारी (राघवचरणानुरागी)

आर एल पाण्डेय
लखनऊ।  रामदुवारे तुम रखवारे.. आज इस वैश्विक महामारी में हमें आत्मबल की अधिक आवश्यकता है। जब कोरोना जैसी महामारी ने सबको अपने आग़ोश में ले लिया हो. तो ऐसे मै सिर्फ़ हनुमान जी की भक्ति ही हमको आध्यात्मिक बल प्रदान कर सकती है। हनुमान जी बुद्ध बल एवं ज्ञान के भंडार है। राम जी भी विपरीत परिस्थिति में हनुमान जी ही सहायक के रूप मै आगे आये ।हनुमान जी जब सब कार्य कुशलता पूर्वक सम्पन करके आये तो. रघु राम जी ने कहा हनुमान मै आपका ये ऋण कभी नही भूल सकता। तो हनुमान जी ने कहा प्रभु ये सब आपका प्रताप है। मै तो साधारण वानर हूँ. मेरे मै कँहा इतना बल था कि
मैं अजेय रावण का सामना कर पाता. मै तो आपके बाण पर सवार होकर सेवक की भाँति गया था | आज युवाओं को हनुमान जी की पूजा से ज़्यादा हनुमान जी के चारित्र को आत्मसार करने की आवश्यकता है। जिससे उच्चनीति युक्त भारत के साथ कौशल युक्त भारत का निर्माण हो सके। उक्त प्रवचन हरि ओम तिवारी “राघवचरणानुरागी ने पंचमुखी हनुमान मन्दिर विष्णुलोक कालोनी कृष्णानगर मैं चल रही रामकथा में दिए । आयोजक आर. सी. मिश्रा ने बताया करोना प्रोटकाल का ध्यान पूर्णरूप से रखा जा रहा है । उचित दूरी के
साथ मास्क सनेटाइजर की व्यवस्था कथा प्रांगण मै है।
कथा का समय शाम 4-7 है।

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