श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

15 फरवरी – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

सुनि बोले गुर अति सुखु पाई ।
पुन्य पुरूष कहुँ महि सुख छाई
जिमि सरिता सागर महुँ जाहीं
जद्पि ताहि कामना नाहीं
तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ
धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ ।।
( बालकांड 293/1-2)
राम राम🙏🙏
राम जी ने धनुष भंग कर दिया है , सीताजी ने जयमाल राम जी को पहना दी है । जनक जी विश्वामित्र जी से आगे की कार्रवाई के बारे में पूछते हैं । विश्वामित्र ने दशरथ को बुलाने को कहा है । दूत पत्रिका लेकर अवधपुर जाते हैं । दशरथ जी ने पत्रिका वशिष्ठ जी को देकर सारी कथा सुनाई है । वशिष्ठ जी कहते हैं कि पुण्यात्मा पुरूष के लिए सारी पृथ्वी सुखों से परिपूर्ण है । जैसे नदियाँ सागर में मिलती हैं पर सागर उन्हें अपने में मिलने के लिए बुलाता नहीं है उसी तरह सुख व संपदा बिना बुलाए ही धर्मात्मा पुरूष के पास चल कर आती हैं ।
धर्मशील बनिए तथा सुख से रहिए । सत्य , दया , तप व दान धर्म है इनमें से एक भी अपने जीवन में अपनाकर आप सुखी हो सकते हैं । राम जी सत्य , दया , तप व दान की प्रतिमूर्ति हैं । राम जी को अपनाकर आप सुखी व संपदावान हो सकते हैं अस्तु धर्मशील बनें , श्री रामशील बनें अथ ! श्री राम जय राम जय जय राम । सीताराम जय सीताराम ।। जय जय सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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