श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

17 मार्च- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

सातवँ सम मोहि मय जग देखा ।
मोतें संत अधिक करि लेखा ।।
आठवँ जथालाभ संतोषा ।
सपनेहुँ नहिं देखइ परदोषा ।।
( अरण्यकांड 35/2)
राम राम 🙏🙏
श्री सीताजी को खोजते हुए श्री राम जी शबरी जी के आश्रम आए हैं और उन्हें नवधा भक्ति बताते हैं । वे कहते हैं कि संसार को समभाव से मुझमें देखना और संतों को मुझसे भी अधिक मानना सातवीं भक्ति है । आठवीं भक्ति जो कुछ मिल जाए उसमें संतोष करना तथा स्वप्न में भी परदोष न देखना है ।
यदि हमें जगत को राममय देखना आ जाए तो अन्य गुण तो स्वतः चले आते हैं , परंतु सारे जगत को राममय देखना तो राम कृपा से ही संभव हो सकता है, अतः लगे रहें, भजते रहें । श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम। श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम।🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *