“रिक्शा सिर्फ सवारी नहीं, जीवन की यात्रा है” — 100 करोड़ क्लब में शामिल गुजराती फिल्म ‘लालो’ अब हिंदी में रचेगी इतिहास ब्यूरो चीफ लखनऊ

“रिक्शा सिर्फ सवारी नहीं, जीवन की यात्रा है” — 100 करोड़ क्लब में शामिल गुजराती फिल्म ‘लालो’ अब हिंदी में रचेगी इतिहास
ब्यूरो चीफ लखनऊ
लखनऊ: गुजराती सिनेमा की ऐतिहासिक उपलब्धि बन चुकी फिल्म ‘लालो – कृष्ण सदा सहायते’ अब हिंदी भाषा में पूरे देश के दर्शकों से जुड़ने के लिए तैयार है। बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर क्षेत्रीय सिनेमा की सीमाओं को तोड़ने वाली यह पहली गुजराती फिल्म है, जो अब 9 जनवरी 2026 को हिंदी में देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

इस अवसर पर फिल्म के निर्देशक अंकित सखिया ने फिल्म के गहरे रूहानी और दार्शनिक पहलुओं पर बात करते हुए कहा,
“यह फिल्म किसी भव्यता या बड़े बजट की मोहताज नहीं है। ‘लालो’ इंसानी रिश्तों, आस्था और निरंतर गतिशील जीवन का उत्सव है। रिक्शा इस कहानी का सबसे सशक्त प्रतीक है, क्योंकि वह कभी रुकता नहीं — ठीक हमारी ज़िंदगी की तरह।”

मैनिफेस्ट फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्माण अजय पडारिया और जय व्यास ने किया है। फिल्म में रीवा राच्छ, श्रुहद गोस्वामी और करण जोशी मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि मिष्टी कडेचा, अंशु जोशी, किन्न्ल नायक, पारुल राज्यगुरु, जयदीप तिमानिया जैसे कलाकारों ने कहानी को मजबूती प्रदान की है।

फिल्म की कहानी एक साधारण रिक्शा चालक लालो के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके रोज़मर्रा के सफर और यात्रियों से संवाद जीवन, आस्था और आत्म-साक्षात्कार की गहरी सच्चाइयों को उजागर करते हैं। निर्देशक के अनुसार, फिल्म में ईश्वर को किसी भारी दर्शन की तरह नहीं, बल्कि हर इंसान में मौजूद एक एहसास के रूप में दिखाया गया है।

काठियावाड़ की लोक-संस्कृति से प्रेरित यह फिल्म बिना किसी बड़े प्रचार के, सिर्फ दर्शकों के प्यार और वर्ड ऑफ माउथ के दम पर 100 करोड़ क्लब में शामिल हुई।
अब ‘लालो – कृष्ण सदा सहायते’ हिंदी में पूरे भारत के दर्शकों को एक सरल, संवेदनशील और आत्मिक अनुभव देने के लिए तैयार है।

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