जौनपुर में कायस्थ समाज ने मनाई विवेकानंद, महेश योगी जयंती
श्री चित्रगुप्त अखाड़ा परिषद स्थापना दिवस पर विचार गोष्ठी आयोजित
जौनपुर नगर के एक होटल में कायस्थ समाज के सभी संगठनों ने संयुक्त रूप से सोमवार की देर रात स्वामी विवेकानंद और महर्षि महेश योगी की जयंती मनाई। को श्री चित्रगुप्त भगवान अखाड़ा परिषद के स्थापना दिवस पर एक विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया।
कायस्थ महासभा 7235 के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश श्रीवास्तव ‘साधु’ ने गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के ज्ञान का परचम लहराया था। आज उनके पदचिन्हों पर चलने की आवश्यकता है। कायस्थ एकता मंच के जिलाध्यक्ष दयाशंकर निगम ने विवेकानंद के प्रसिद्ध उद्घोष “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य साकार न हो जाए” को दोहराया। कायस्थ संघ अंतर्राष्ट्रीय के जिला अध्यक्ष अजय वर्मा ‘अज्जू’ ने युवाओं से विवेकानंद के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय महासचिव राजेश श्रीवास्तव ‘बच्चा भईया’ एडवोकेट ने महर्षि महेश योगी के प्रेरणादायक सफर पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे महेश प्रसाद वर्मा शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती जी द्वारा ‘बाल ब्रह्मचारी’ की उपाधि पाकर ‘महर्षि महेश योगी’ बने और समाज में बड़ा योगदान दिया। ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस के जिला अध्यक्ष डॉ. उमाकांत श्रीवास्तव प्रिंसिपल ने बताया कि महर्षि योगी ने 1959 में अमेरिका से अपनी विश्व यात्रा शुरू की थी। उनके दर्शन का मूल आधार था कि जीवन परमानंद से भरपूर है और मनुष्य का जन्म इसका आनंद उठाने के लिए हुआ है।
कायस्थ महासभा के जिला अध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव एडवोकेट ने भगवान श्री चित्रगुप्त जी अखाड़ा परिषद के गठन के लिए स्वामी चक्रपाणि महाराज का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कुंभ मेले में हर वर्ग का अखाड़ा परिषद होता था, अब श्री चित्रगुप्त भगवान अखाड़ा परिषद भी सेवा और समर्पण के लिए लगता है।
कायस्थ महासभा के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश चंद्र श्रीवास्तव ‘दीनू’ ने कहा कि कायस्थ समाज ने देश के हर क्षेत्र में सक्रिय योगदान देकर समाज का नाम रोशन किया है। कायस्थ महासभा के संरक्षक बजरंग प्रसाद श्रीवास्तव एडवोकेट ने कहा कि आज के आयोजन में दिखाई देने वाली एकता ही महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ‘सोनू’ भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

