एसआईआर के नाम पर आम नागरिकों को किया जा रहा परेशान
(राजन तिवारी सिटी रिपोर्टर )
अयोध्या।एसआईआर को लेकर बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष ने अपनी ही सरकार के सरकारी तंत्र से सवाल किया है।मिर्जापुर के पूर्व जिलाध्यक्ष गंगासागर दुबे ने वीडियो वायरल कर वोटरलिस्ट में चल रहे कार्य पर प्रश्नचिन्ह खङा किया है।दूबे ने बताया है कि निर्वाचन आयोग पूर्वजों के दस्तावेज मांग रहा है।उनका कहना है कि मेरी आयु लगभग 69 साल व मेरी माँ लगभग 91 वर्ष की हैं,मेरे नाना की मृत्यु लगभग 65 वर्ष पूर्व हो चुकी है, मेरी मां को नोटिस मिली है कि मेरे नाना एवं मां की आयु में असंतुलन है,कृपया डॉक्यूमेंट से स्पष्ट करें, समझ नहीं पा रहा हूँ कि जब नाना की मृत्यु 1960 के आस-पास ही हो गयी तो उनकी उम्र इन्हें किस दस्ताबेज में मिला जिससे यह टैली कर रहे हैं, यही गोरख धंधा चल रहा है वोटर लिस्ट में हेराफेरी का।समाजवादी पार्टी पिछड़ावर्ग प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौ.लौटनराम निषाद ने निर्वाचन आयोग की रवैया पर प्रश्नचिह्न खङा करते हुए मतदाताओं की 4 श्रेणी बनायी गई थी जिसमें कहा गया था कि जिनका जन्म 1987 से पूर्व हुआ व उनका नाम 2003 की मतदाता सूची में रहा है,उन्हें ईपिक नम्बर के अलावा कोई दस्तावेज नहीं देना है।अब जब 6 फरवरी को 1 महीने का समय बढ़ाया तो पीडीए का वोट काटने के लिए भाजपा कार्यकर्ता बल्क में प्रिंटेड फार्म-7 बीएलओ को दे रहे थे,जब भंडाफोड हुआ तो अब नोटिस का खेल शुरू हो गया है। 6 दिसम्बर तक जिनका ड्राफ्ट रोल में नाम आ गया था,उनको भी नोटिस जारी की जा रही है।
निषाद ने बताया कि अधिकांश मतदाता का मतदाता सूची में पूरा नाम नहीं न होकर सिर्फ फर्स्ट नेम ही होता है,मध्य नाम व उपनाम नहीं रहता।किसी के नाम में उपनाम शामिल है पर पिता के नाम में नहीं और स्वयं का सिर्फ नाम है व पिता के नाम में उपनाम लगा है,ऐसे लोगों को भी नोटिस जारी कर कहा जा रहा कि नाम की मैचिंग नहीं हो रहा है।प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रामाणिक नाम अजय मोहन सिंह बिष्ट और पिता का नाम आनंद सिंह बिष्ट रहा है,तब तो इनका भी नाम मतदाता सूची में नहीं दर्ज हो सकता।उन्होंने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से नोटिस दर नोटिस भेजकर आम नागरिकों को जिस तरह परेशान किया जा रहा है,उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान करने के दिशा-निर्देश जारी किया जाय।

