श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

13 जनवरी – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

पाई न केहिं गति पतित पावन,
राम भजि सुनु सठ मना ।
गनिका अजामिल ब्याध गीध,
गजादि खल तारे घना ।।
( उत्तरकांड, छंद दोहा 129 पश्चात)
जय सियाराम 🙏
श्री राम कथा को पूर्ण करते हुए पूज्यपाद गोस्वामी श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि कपट छोड़कर जिसने भी श्री राम जी को भजा उसे परम गति मिली । अपने मन को समझाते हुए वे कहते हैं कि अरे मूरख मन ! तू सुन , पतितों को भी पावन करने वाले श्री राम जी को भजकर किसने परमगति नहीं पा ली है । गणिका , अजामिल , व्याध , गीध , गज आदि दुष्टों को भी उन्होंने तार दिया है ।
आत्मीय जन ! श्री राम जी ने तो सबको तार दिया जिसने भी श्री राम नाम जपा । परंतु कपट के कारण हमारा मन है कि सुनता ही नही, मानता ही नहीं है । अतः अपने मन को बार बार मनाइए, इसे समझाइए तथा इसे श्री राम भजन में लगाइए । अथ…… श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

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