गीता प्रवचन स्वाध्याय का 81वाँ सप्ताह सफलतापूर्वक सम्पन्न : अमित परमार
देश की उपासना ब्यूरो:
गीता प्रवचन स्वाध्याय का 81वाँ सप्ताह ऑनलाइन माध्यम से सम्पन्न हुआ। इस सत्र में गीता प्रवचन के अध्याय में वर्णित तमोगुण के एक और उपाय विषय पर चिंतन किया गया। श्री अमित परमार द्वारा विषय का प्रवेश कराया गया, जिसमें आलस्य, निद्रा और प्रमाद के संदर्भ में गहन विचार प्रस्तुत किए गए। आदरणीय ज्योत्सना दीदी, प्रोफेसर पुष्पेंद्र शर्मा तथा अन्य साथियों ने क्रमशः पैराग्राफ के आधार पर विषय का सार स्पष्ट किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्म विद्या मंदिर, पवनार से ज्योत्सना बहन द्वारा मंगलाचरण के साथ किया गया। उन्होंने बताया कि जीवन में परमात्मा की स्मृति और सजगता अत्यंत आवश्यक है। निद्रा अपने आप में पवित्र है, परंतु उसका महत्व लंबाई में नहीं, बल्कि गहराई में है। जैसे कुएँ का जल जितना गहरा होता है उतना ही स्वच्छ होता है, वैसे ही थोड़ी किंतु गहरी और निर्विघ्न नींद ही शरीर और मन को वास्तविक विश्राम देती है। स्वप्नों और व्यर्थ चिंतन से मुक्त नींद ही सच्चा आराम प्रदान करती है।
इसके पश्चात प्रोफेसर पुष्पेंद्र शर्मा ने विषय को आगे बढ़ाते हुए बताया कि दिनभर श्रम करने वाला व्यक्ति ही गहरी और शांत निद्रा का अनुभव कर सकता है। केवल बिस्तर पर पड़े रहने से विश्राम नहीं मिलता। यदि जीवन का अधिकांश भाग सोने में ही व्यतीत हो जाए तो पुरुषार्थ और साधना बाधित हो जाते हैं। अधिक निद्रा से तमोगुण का तीसरा दोष ‘प्रमाद’ उत्पन्न होता है, जिससे विस्मृति और असावधानी बढ़ती है। यह स्थिति व्यक्ति के आध्यात्मिक और सांसारिक जीवन दोनों के लिए हानिकारक है।
आदरणीय सुरेश गर्ग और रमेश भैया जी समापन वक्तव्य रखे और बताया कि आलस्य और प्रमाद से बचने के लिए निरंतर जागरूकता, विचारपूर्वक कर्म और समय का सदुपयोग आवश्यक है। “पहले विचार, फिर कर्म” की आदत विकसित करनी चाहिए। नियमित श्रम, सजगता और आत्मनियंत्रण से तमोगुण पर विजय प्राप्त की जा सकती है। कार्यक्रम के अंत में सभी सहभागियों ने संकल्प लिया कि गीता के इन शिक्षाओं को दैनिक जीवन में अपनाकर जीवन को अधिक पुरुषार्थमय और जागरूक बनाया जाएगा।
अमित परमार ने प्रोग्राम में जुड़े आदरणीय ज्योत्सना पटेल, पुष्प्रेंद्र जी, बिमलमुंडे जी,अनिल उपाध्याय जी, सीमा देशमुख, सत्रुधन झा, दीपिका उपाध्याय, दिलीप पवार, चतुरा रासकर, शिवम वाडा, डॉ. सुरेश गर्ग, हेमा ब्रह्मभट्ट, मनोज मीता पांडेय, क्रति शाह, उषा शर्मा, संदीप कुमार वर्मा, करूनेश राव, मनीषा, प्रोफेसर देवराज सिंह, आदरणीय रमेश भैया जी, बिमला दीदी, कुसुम जी, नाथूराम भाई, कविता जी, अलका प्रकाश पाण्डेय जी , आदरणीय सुरेश गर्ग और मनोज मीता जी, शिवाकान्त जी, ओमप्रकाश जी, वर्षा शाह जी, उषा शर्मा आदि सहभागियों को स्वाध्याय परिवार मे नियमित जुडने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। साप्ताहिक स्वाध्याय प्रत्येक रविवार सायं 6:15 से 6:45 बजे ऑनलाइन आयोजित होता है स्वाध्याय से जुड़ने के लिए आप मोबाइल नंबर 9670511153 अथवा ईमेल amitparmar47@gmail.com के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं।

