14 जनवरी :रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
स्वामि सखा पितु मातु गुर,
जिन्ह के सब तुम तात।
मन मंदिर तिन्ह कें बसहु,
सीय सहित दोउ भ्रात ।।
( अयोध्याकाण्ड, दो. 130)
राम राम जी🙏
श्री राम जी वन जाते हुए पूज्यपाद बाल्मीकि मुनि जी के आश्रम पहुँचे हैं । वे बाल्मीकि जी से अपने रहने का स्थान पूछते हैं । बाल्मीकि जी कहते हैं कि हे राम जी ! जिनके स्वामी , मित्र, माता, पिता और गुरु सब कुछ आप ही हैं, उनके मन रूपी मंदिर में श्री सीता सहित आप दोनों भाई निवास कीजिये ।
बंधुवर ! श्री राम जी की मर्यादा का पालन हमें न करना पड़े, वे केवल हमें लाभ दें, इसी भावना के कारण वे हमसे दूर हैं क्योंकि हम स्वार्थी जीव बस यही संबंध श्री राम जी से रखना चाहते हैं। यदि हम सब भी अपने जीवन के मन्दिर में श्री सीताराम जी का निवास और साहचर्य पाना चाहते हैं तो ईमानदारी से श्री सीताराम जी को ही अपना सब कुछ जानना और मानना पड़ेगा और निरन्तर नाम भजन के साथ उनके समीप रहना पड़ेगा। अथ…..श्री राम जय राम राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

