:श्री रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

16 जनवरी:श्री रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

बड़ अधिकार दच्छ जब पावा अति अभिमानु हृदयँ तब आवा।।
नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं।
प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं ।।
( बालकांड 59/4)
राम राम जी 🙏🙏
माता सती जी को त्याग कर भगवान शिव जी समाधि में चले गये हैं, माता सती दुखी हैं, हज़ारों साल बाद भगवान शिव जी समाधि से बाहर आते हैं , श्री राम नाम जपने लगते हैं , सती उनकी वंदना करती हैं, शिव जी उन्हें भगवान की कथा सुनाते हैं।उसी समय ब्रह्मा जी ने दक्ष को प्रजापतियों का मुखिया बना दिया । जैसे ही दक्ष को अधिकार मिला, उन्हें अभिमान हो गया । जगत में ऐसा कोई पैदा नहीं हुआ है जिसे प्रभुता पाकर अहंकार न हुआ हो ।
बंधुवर ! अधिकार अहंकार को जन्म देता है, अहंकार जीवन नष्ट कर देता है ।जीवन में अहंकार नहीं श्री राम जी को पाने की चेष्टा करें, श्री राम जी को पाने पर अहंकार नही विनम्रता आती है और जीवन सुखद हो जाता है । अथ…. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

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