कड़कड़ाती ठंड में खुले में सोने को मजबूर है गरीब-
-मुखयमंत्री के आदेश के बाद भी ऐशबाग पुल पर खुले में सोने को मजबूर है मजबूर-
लखनऊ.एक तरफ प्र्रदेश के मुख्यमंत्री का स्पष्ट आदेश है कि कोई भी इस हाड़-कपाउ ठंड में खुले में सोता नजर न आये। बाबजूद हसके नगर निगम और पुलिस प्रशासन के जिम्मेदारों की लापरवाही सामने आ रही है। थाना नाका किंडोला और थाना बाजारखाला, दो-दो थानों की सीमा के बीच स्थित ऐशबाग रेलवे पुल का हाल किसी को नजर नहीं आ रहा है।
ऐशबाग पुल पर इस कड़कड़ाती ठंड मे भी गरीब खुले में सोने को मजबूर है। उसे रैनबसेरों की गर्माहट नसीब नहीं हो पा रही है।ं उ0प्र0 के मुख्यमंत्री तो संवेदनशील है। परंतु मुख्यमंत्री के आदेश का पालन करवाने वाले जिम्मेदारों के पास संवेदनशीलता नहीं है। खुले में सोने वाले ये गरीब कौन है, ये कहां से आते है और क्यों इस ठंड में खुले में सो जाते है? इसकी जानकारी न तो पुलिस प्रशासन और न नगर निगम के पास है। अनेक सामाजिक संगठन जो केवल अखबारों में फोटों खिचाने और अपने दान का प्रचार करते है, वे संगठन भी इन गरीबों की कोई सुध नहीं लेते है। गरीब तो बस खुले में सोने को मजबूर है।

