प्रो.के.पी.सिंह की पुस्तक “न्यू पार्लियामेंट-द वॉयस ऑफ़ भारत का लोकार्पण किया गया

नई संसद 140 करोड लोगों की भावनाओं का प्रतिबिंब है-राज्यपाल

प्रो.के.पी.सिंह की पुस्तक “न्यू पार्लियामेंट-द वॉयस ऑफ़ भारत का लोकार्पण किया गया

देश की उपासना ब्यूरो पी अस्थाना दिल्ली

नई दिल्ली।अकादमिक जगत में अपनी कर्तव्यनिष्ठा के लिए प्रसिद्ध दिल्ली विश्वविद्यालय के गांधी भवन के निदेशक व पुस्तकालय विज्ञान विषय के अद्वितीय प्रो. के.पी. सिंह की बहु प्रतीक्षित पुस्तक,” न्यू पार्लियामेंट – द वॉयस ऑफ भारत ” का मंगलवार को उत्तराखंड सदन में उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह के कर कमलों द्वारा संपन्न हुआ। आरंभ में प्रो. के.पी. सिंह ने महामहिम राज्यपाल को पुष्पगुच्छ,अंग वस्त्रम, स्मृति चिन्ह एवं श्रीमद् भागवत गीता की प्रति भेंट कर स्वागत किया।

प्रो. के.पी.सिंह ने अपने स्वागत वक्तव्य में महामहिम राज्यपाल का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी वजह से उनको पुस्तकों के लेखन की प्रेरणा प्राप्त हुई है । उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के समय से लेकर आज तक लगातार 4 पुस्तकें क्रमानुसार प्रकाशित हुई हैं। अपनी पुस्तक के प्रेरणा का कारण बताते हुए कहा कि नए संसद भवन का उद्घाटन भारतीय संस्कृति की पुनःप्राप्ति का अवसर था और पूरा देश भावुक था तो उस समय को संजोने के लिए इस पुस्तक को प्रकाशित किया। पुस्तक के विषय में चर्चा करते हुए अटल प्रकाशन की ओर से उपासना काबरा ने कहा कि इस पुस्तक में नए संसद भवन के निर्माण के संकल्प में जिस तरह के वास्तु से लेकर पौराणिक एवं आधुनिक भारत के मिश्रण का जिक्र है । उन्होंने बताया कि 307 पृष्ठ की इस पुस्तक में उस समय देश की भावनात्मक मनोदशा एवं वैचारिकी का विवरण है।

स्वागत वक्तव्य के पश्चात माननीय महामहिम राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह ने प्रो.के. पी. सिंह की पुस्तक का विमोचन किया । अपने उद्बोधन में महामहिम राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह जी ने प्रो. के.पी. सिंह जी को इस अद्वितीय पुस्तक के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आह्वान करते हुए कहा कि हम सभी को लक्ष्य प्राप्ति के लिए खड़ा होना ही पड़ेगा , यही नवीन संसद भवन का विचार है। संसद का नयापन राष्ट्र का नयापन है। विश्वगुरु भारत की हुंकार है। नया संसद भवन 21वीं सदी के भारत का भवन है । उन्होंने कहा कि अपने विचारों को अपने स्थानों को अपने संस्थानों को नयापन देना ही होगा। उन्होंने आगे कहा कि हम सब जानते हैं कि भारत लोकतंत्र की जननी है। यहीं लोकतंत्र जन्मा है। उदाहरण देते हुए कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि यह संसद भवन भारत की अपनी थाती को समाहित किए हुए है। जिस तरह से संविधान ने हमें त्याग की प्रेरणा दी हैं वह त्याग , समन्वय और समरसता सब कुछ नए संसद भवन में दिखाई देती है।

महामहिम राज्यपाल ने बताया कि नए संसद भवन के उद्घाटन के समय भारत के हृदय के उद्गार क्या थे वो इस पुस्तक में है। उन्होंने प्रो. के.पी. सिंह जी के विषय ने बात करते हुए कहा कि प्रो. सिंह जी को चुनौतियां लेना ही सबसे अधिक पसंद है और वही इनके जीवन का असली आनंद है । पुस्तकालय विज्ञान अब केवल वो शांत जगह नहीं है और प्रो. के.पी. सिंह जैसे क्रियाशील पुस्तकालय विज्ञानियों ने इसे आधुनिक थियेटर बनाया है। संसद भवन के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि रिकार्ड समय में पूरे होने वाले इस प्रोजेक्ट में सब कुछ अनोखा है। इसमें वास्तुकला का अद्भुत समागम है। भारत के वैदिक समय की छाप से लेकर मौर्य वंश के प्रतीक चिह्न, चोल राजाओं द्वारा बने मंदिरों की छाप से लेकर , भारतीयता को समेटे हुए भित्ति चित्र एवं छायाचित्र सहित सेंगोल की स्थापना तक सब कुछ भारतमय है। एक – एक पत्थर से लेकर भवन का एक एक भित्ति चित्र प्राचीन भारत को आधुनिक भारत से जोड़ता है। हर भारतीय ने इस परिवर्तन को अपने हृदय में संजोया है। यह पुस्तक उसी नए संसद भवन के उत्सव का प्रतिबिंब है। यह केवल भवन नहीं अपितु जीवंत भारत और भारतीयता की आत्मा है। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस संबोधन का जिक्र किया जिसको एक गीत में कहा गया था —
नवीन पर्व के लिए नवीन प्राण चाहीए।
मुक्त मातृभूमि को नवीन मान चाहिए। उन्होंने हर्ष व्यक्त किया कि इस पुस्तक से और नवीन संसद भवन से हमने परतंत्रता की मानसिकता को दूर फेंक कर भारत की वास्तविक स्वतंत्रता को आत्मसात किया है।

कार्यक्रम के अंत में दिल्ली विश्वविद्यालय के पुस्तकालय विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आर के भट्ट जी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पिंकी शर्मा जी ने किया। कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के पुस्तकालय विज्ञान विभाग से ,विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार भट्ट, दयाल सिंह कॉलेज की प्राचार्य प्रो. भावना पाण्डेय, श्री अरविंदो कॉलेज प्रोफेसर हंसराज सुमन, पुस्तकालय विज्ञान विभाग प्रो.जे. एन. सिंह , प्रो.मीरा, डॉ.मनीष कुमार, डॉ.पिंकी शर्मा, अटल प्रकाशन संदीप जैन,उन्नत जैन, उपासना काबरा सहित शिक्षाविद, समाजसेवी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

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