रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

5 फरवरी : रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

जाति पाँति धनु धरम बड़ाई ।
प्रिय परिवार सदन सुखदाई ।।
सब तजि तुम्हहि रहइ उर लाई ।
तेहि के हृदयँ रहहु रघुराई ।।
( अयोध्याकाण्ड 130/3)

श्री राम जी वन जाते हुए बाल्मीकि जी के आश्रम पहुँचे हैं और उनसे अपने रहने का स्थान पूछते हैं । बाल्मीकि जी कहते हैं कि जाति , धन , धर्म , परिवार, घर आदि छोड़कर जो केवल आपको अपने हृदय में धारण किए रहता है, हे राम ! आप उसके हृदय में वास कीजिए ।
बंधुवर, जितनी आपने ऊपर की शर्तें मानी है उतना ही श्री राम जी का आपके हृदय में वास है । अतः धीरे धीरे जगत को अपने हृदय से निकालिए और जगदीश का साथ पाइए । अथ…..श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

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