चौदह कोसी मार्ग चौड़ीकरण में अफसरों की मिलीभगत से नहीं हट रहा अतिक्रमण

चौदह कोसी मार्ग चौड़ीकरण में अफसरों की मिलीभगत से नहीं हट रहा अतिक्रमण

(राजेश श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ)

अयोध्या। अयोध्या के विकास और श्रद्धा की प्रतीक चौदह कोसी परिक्रमा मार्ग परियोजना पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मिलीभगत का काला साया मंडराने लगा है। शासन की प्रमुख प्राथमिकता वाली इस योजना में अवैध निर्माण और सरकारी नाले पर किए गए अतिक्रमण को लेकर अब सीधे तौर पर लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि उच्चाधिकारियों के स्पष्ट आदेशों के बावजूद धरातल पर कार्रवाई शून्य है, जिससे न केवल परियोजना की रफ़्तार सुस्त पड़ गई है, बल्कि सरकारी तंत्र की मंशा पर भी संदेह गहरा गया है।प्रकरण की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लोक निर्माण विभाग (निर्माण खण्ड-3) के अधिशासी अभियंता ने जनवरी 2025 में ही लिखित आदेश जारी कर स्पष्ट किया था कि परिक्रमा मार्ग की परिधि में आने वाले बाधक भवनों को हटाया जाना अनिवार्य है। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, महीनों बीत जाने के बाद भी बुलडोजर खामोश है।इस प्रशासनिक शिथिलता के पीछे भ्रष्ट तत्वों और अधिकारियों की गहरी साठगांठ की आशंका जताई जा रही है। हद तो तब हो गई जब उप जिलाधिकारी सदर द्वारा कथित तौर पर यह बयान दिया गया कि ‘जो हो गया, वो हो गया, अब कुछ नहीं हो पाएगा’—यह वक्तव्य न केवल प्रशासनिक मर्यादाओं के विपरीत है, बल्कि अवैध कब्जा करने वालों को खुलेआम संरक्षण देने का प्रमाण भी माना जा रहा है।सबसे चिंताजनक पहलू सरकारी नाले पर किया गया अवैध निर्माण है। अतिक्रमणकारियों ने जल निकासी के मुख्य स्रोत को ही अवरुद्ध कर दिया है, जिससे भविष्य में भीषण जलभराव का खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार विरोधी नीति को उन्हीं के अधीनस्थ अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। अधिकारियों की यह ‘मौन स्वीकृति’ सीधे तौर पर शासन की छवि को धूमिल कर रही है और विकास कार्यों के नाम पर कागजी खानापूर्ति का संकेत दे रही है।अयोध्या की गरिमा और परिक्रमा मार्ग की पवित्रता को देखते हुए अब इस पूरे मामले की जांच सीबीआई, विजिलेंस या किसी विशेष जांच दल (एस आई टी) से कराने की मांग जोर पकड़ रही है।मांग की गई है कि सरकारी नाले और अधिग्रहित भूमि से तत्काल अतिक्रमण हटाया जाए और विकास कार्य में रोड़ा अटकाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो अयोध्या का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ सकता है। जनता अब मुख्यमंत्री से न्याय की आस लगाए बैठी है ताकि अयोध्या के विकास पथ से अतिक्रमण का यह कलंक मिट सके।

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