यूजीसी के नाम पर अराजकता फैलाने वाले लोगों को खुली चेतावनी दिए समाजसेवी अतुल तिवारी 

यूजीसी के नाम पर अराजकता फैलाने वाले लोगों को खुली चेतावनी दिए समाजसेवी अतुल तिवारी

 

“सवर्ण समाज और पत्रकारों” के साथ यूजीसी प्रदर्शन के नाम पर हो रहे हिंसा व अभद्रता पर कड़ा आक्रोश जताया है – समाजसेवी अतुल तिवारी

 

अराजक तत्वों पर कार्रवाई हो, वरना हमें सड़क पर उतरने को विवश होना पड़ेगा : प्रदेश संगठन मंत्री, अतुल तिवारी

 

“UGC” प्रदर्शन में पत्रकारों पर हमले के दोषियों को तुरंत गिरफ्तार करे पुलिस : अतुल तिवारी, प्रदेश संगठन मंत्री (अखिल भारतीय हिंद सेवा दल)

 

 

 

जौनपुर।

जाफराबाद विधानसभा के निवासी, अखिल भारतीय हिंदू सेवा दल उत्तर प्रदेश के प्रदेश संगठन मंत्री व प्रमुख समाजसेवी अतुल कुमार तिवारी (बुद्धिमान) ने दिल्ली सहित देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों (JNU, DU, BHU, AU) में यूजीसी प्रदर्शन के नाम पर हुई हिंसा और अभद्रता पर कड़ा आक्रोश जताया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए श्री तिवारी ने सवर्ण समाज और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी पत्रकारों के अपमान को हिंदुस्तान के लिए असहनीय बताया। समाजसेवी अतुल कुमार तिवारी ने चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ द्वारा दिल्ली में यूजीसी के समर्थन में किए गए विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदर्शन की आड़ में पत्रकारों के साथ मारपीट, महिला पत्रकारों को भीड़ द्वारा घेरकर अभद्र व्यवहार करना और उन्हें अपमानित करना बेहद कायरतापूर्ण कृत्य है। उन्होंने कहा कि यूजीसी के बहाने सवर्ण समाज के खिलाफ आपत्तिजनक व अभद्र टिप्पणियां करना एक गंभीर कानूनी अपराध है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों की चुप्पी को उन्होंने बेहद शर्मनाक बताया। अतुल तिवारी ने कड़े लहजे में कहा कि जो लोग प्रदर्शन के नाम पर किसी जाति या समाज का अपमान करते हैं, वे उनकी नजर में नेता या छात्र की श्रेणी में नहीं आते, बल्कि वे “अनपढ़, गवार और जाहिल” हैं। ऐसे लोग केवल अराजकता फैलाने वाले और आपसी सौहार्द बिगाड़ने वाले असामाजिक तत्वों की श्रेणी में आते हैं।

प्रदेश संगठन मंत्री समाजसेवी अतुल कुमार तिवारी ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों के आधार पर इन अराजक तत्वों को चिन्हित कर तत्काल गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते शासन-प्रशासन ने कठोर कार्रवाई नहीं की, तो संगठन को विवश होकर सड़कों पर उतरना पड़ेगा और इन अराजक तत्वों को इन्हीं की भाषा में जवाब दिया जाएगा।

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