श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

29 दिसम्बर- श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏

धरम धुरीन धरम गति जानी ।
कहेउ मातु सन अति मृदु बानी ।।
पिता दीन्ह मोहि कानन राजू ।
जहँ सब भाँति मोर बड़ काजू ।।
( अयोध्याकाण्ड 52/3)
राम राम 🙏🙏
दशरथ जी से मिलकर राम जी माता कौशल्या से वन जाने की अनुमति लेने के लिए आते हैं । कौशल्या जी कहती हैं कि बहुत देर हो गई है, कुछ खाकर राम पिता जी के पास जाओ । राम जी ने धर्म की गति जानकर सहजता से माँ से कहा कि पिताजी ने मुझे वन का राज्य दिया है जहाँ सब प्रकार से मेरा बड़ा काम होने वाला है ।
अपने श्रेष्ठ की बात मान लेना ही राम धर्म है और राम जी का रामत्व है । जिसने भी अपने श्रेष्ठ की बात मानी है उसके सब मनोरथ पूर्ण हुए हैं । अस्तु हम आप भी राम धर्म निभाना चाहते हैं तो अपने श्रेष्ठ की आज्ञा पालन करें , हमारे भी सब कार्य बन जाएँगे । अथ ! जय राम जय राम जय जय राम 🚩🚩🚩

संकलन तरुण जी लखनऊ

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