अयोध्या।हुजूर,दावे चाहे हजार हों जनप्रतिनिधियों द्वारा चाहे संपूर्ण राशि अनुदान के रूप में जनहित के कार्यों में वितरित करने का दावा किया जा रहा हो,फिर भी व्यवस्था है सुधरने का नाम नहीं लेती। कारण चाहे जो भी हो लेकिन सरकार व सरकार के नुमाइंदों सहित प्रशासन की ताकत का भय अब स्वास्थ्य महकमे के कर्मचारियों में नहीं रह गया, यह साबित करती है, सैकड़ों करोड़ रुपए लागत से बना स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के सापेक्ष दर्शन नगर स्थित मंडलीय चिकित्सालय में आए दिन मरीजों के तीमारदारों वह मरीजों के साथ मारपीट जैसी घटनाएं साथ ही कोविड पेशेंट के बिना एडमिट किए, बिना स्ट्रेचर मुहैया कराये गेट पर ही दम तोड़ने की घटनाएं। आमजन जोकि उस समय अभिभावक के रूप में मौजूद रहते हैं उनके पास चिल्ला चिल्ला कर हाथ मलने के सिवाय कुछ नहीं रह जाता, जिसका जीता जागता उदाहरण आज हमारे मित्र मंडी गेट के सामने देव नगर कॉलोनी निवासी अद्वैत कांत मिश्रा के पिताजी राधेश्याम मिश्रा के साथ जो घटित हुआ वाकई अब प्रशासन,सरकार के नुमाइंदों व स्वास्थ्य व्यवस्थाओं से विश्वास ही उठ गया । लगभग 7:30 बजे शाम को दर्शन नगर स्थित मंडलीय चिकित्सालय से मेरे उपरोक्त मित्र का फोन आया फोन उठाते ही हल्ला सुनाई देने की आवाज आई कुछ देर बार उधर से रोते हुए अद्वैतकांत ने बताया कि उनके पिता राधेश्याम मिश्रा की मृत्यु जिनको कोरोना पॉजिटिव होने के बाद आज पूर्वान्ह 11:00 बजे से दर्शननगर मंडलीय चिकित्सालय के गेट पर इलाज का इंतजार करते करते लगभग 7:15 शाम पर मृत्यु को प्राप्त हो गये, पुत्र के द्वारा व्यवस्था व व्यावहार पर नाराजगी भी जताई जा रही थी,उसी की आवाज फोन उठाते ही मेरे द्वारा सुनी गई उनके द्वारा बताया गया कि उनके एक मित्र डॉक्टर के रिकमेंडेशन पर अपने पिताजी को सुबह 11:00 बजे मेडिकल कॉलेज ले जाया गया और वह भी मित्र डॉक्टर के आश्वासन के बाद कि किसी भी प्रकार से ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी जाएगी, सिलेंडर मुहैया कराया जाएगा लेकिन वास्तव में क्या हुआ 11:00 से शाम 7:15 तक उनको अटेंड ही नहीं किया गया, यहां तक कि स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं कराया गया गेट पर ही गाड़ी में राधेश्याम मिश्रा जी मृत्यु को गले लगा लिये। उपरोक्त जानकारी स्वयं मृतक के पुत्र द्वारा मंडलीय चिकित्सालय से ही फोन पर दी गई।

