लखनऊ : टूटे समीकरणों को जोड़ने में राष्ट्रीय लोकदल पास हो गई। खोई जमीन तलाश करने की कवायद में रालोद ने जोरदार मेहनत की जिसका परिणाम यह आया कि पंचायत चुनाव में रालोद पश्चिम यूपी में खास बन कर सामने आई। जिला पंचायत सदस्य की 65 से ज्यादा सीटें जीतकर रालोद मजबूती से खड़ी हुई है । कई जिलों में तो वह अध्यक्ष के पद पर भी दावा पेश करने की तैयारी में है।
किसानों के इर्द-गिर्द राजनीति करने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय लोक दल को इस चुनाव से बड़ी आस थी। दरअसल, लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल पूरी तरह से धड़ाम हो गया था। खुद रालोद सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह चुनाव हार गए तो पार्टी के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी चारों खाने चित हो गए थे। ऐसे में इस चुनाव को लेकर रालोद खोई जमीन तलाश करने की कवायद में था।
दरअसल, मुजफ्फरनगर दंगों के बाद राष्ट्रीय लोक दल का जाट मुस्लिम प्लस अन्य समीकरण छिन्न-भिन्न हो गया था। खासतौर से जिला पंचायत सीटों पर रालोद ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। ऐसे जिलों में भी अच्छी खासी सीटें रालोद को मिली जहां उम्मीद कम थी।
रालोद को मिली यह संजीवनी निश्चित रूप से अगले साल यूपी के विधानसभा चुनावों में उसके लिए टॉनिक साबित होगी। पार्टी थिंक टैंक इस बात को बखूबी समझ भी रहा है और पंचायत चुनाव में मिली इस सफलता को पूरी तरह से भुनाने की तैयारी में है।
यह हमारी सेवा का परिणाम
रालोद के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुपम मिश्रा ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के परिणामों को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की है। उनके मुताबिक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने कहा है मेहनत व जनता के मध्य उपस्थिति तथा जनसमस्याओं के निस्तारण हेतु जनमानस के मध्य सतत उपस्थिति का ही परिणाम है जो आपको जनता ने चुना है।
यूपी के संगठन मंत्री डॉ. राजकुमार सांगवान ने कहा कि रालोद ने जिस तरह से लोगों के बीच जाकर उनके दर्द को समझा यह जीत उसी का परिणाम है। इसके दूरगामी परिणाम निकलेंगे। राष्ट्रीय सचिव अनिल दुबे ने कहा कि कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम सामने आया है।

