8 मई – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
ता कहुँ प्रभु कछु अगम नहिं
जा पर तुम्ह अनुकूल ।
तव प्रभावँ बडवानलहि जारि सकइ खलु तूल ।।
( सुंदरकांड , दो. 33)
राम राम 🙏🙏हनुमान जी सीता जी का पता लगाकर, लंका जला कर लौट आए हैं । राम जी पूछते हैं कि यह सब आपने कैसे किया । हनुमान जी कहते हैं कि इसमें मेरा कुछ नहीं यह सब आपका प्रताप है । प्रभु ! जिसके भी आप अनुकूल होते हैं वह कुछ भी कर सकता है । आपके प्रभाव से रूई समुद्र की अग्नि को जला सकती है अर्थात् असंभव को संभव कर सकता है ।
राम जी जिसके अनुकूल होते हैं वह कुछ भी कर सकता है परंतु राम जी भी उसी के अनुकूल होते हैं जो उनके अनुकूल होता है । अत: राम अनुकूल बनें, राम जी की सुनें व राम जी की करें । अथ ! राम राम जय राम राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

