गो माता की घर वापसी,जन पुरुषार्थ और गो महत्व बताने से ही होगी संभव: डॉ यशवंत मैथिल

  हरदोई। विनोबा सेवा आश्रम बरतारा के तथागत कुटीर में आयोजित गो घर वापसी अभियं संगोष्ठी का शुभारंभ सर्वधर्म प्रार्थना ओम तत्सत श्री नारायण तू से हुई । सभी अतिथियों का परिचय कराते हुए  डॉ यशवंत मैथिल ने कहा ,कि हमारी गौ माता की स्थिति धीरे-धीरे बहुत ही दयनीय होती जा रही है। इसको संभालने के लिए गाय के गोमूत्रऔर गोबर के उत्पाद बनाने आवश्यक होंगे। इसके लिए हमें देश के प्रख्यात वैज्ञानिकों का सहयोग लेना होगा। इसी क्रम में यह गोष्ठी आयोजित हुई है ।         विनोबा गो सेवा सदन की अध्यक्ष जमनालाल बजाज पुरुस्कार से सम्मानित विमला  बहन ने बताया कि 11 अक्टूबर 1996 को विनोबा सेवा आश्रम ने 11 गायों से गौ सेवा का काम शुरू किया था। जो अब 111 गाय तक पहुंचा है। इन 111 गायों का गोबर पूर्ण रूप से प्रयोग करके लगभग 1100 कुंतल खाद आज बनाने का काम गौ सदन करता है। गोमूत्र का प्रयोग भी कामधेनु रसायन के रूप में प्रयोग किया जाता है। जिससे यह गौशाला धीरे धीरे स्वावलंबन की ओर बढ़ रही है ।  प्रसाशन भी सहयोगी है।                          मुंबई से पधारे श्री ओम प्रकाश यादव ने कहा की ठाणे जिले में 123 गौशाला है  जिनमें गोबर गोमूत्र से अधिक से अधिक उत्पाद बनाने का काम हम कराते हैं हमें लगता है । कि आज गौशालाओं को प्राथमिकता के आधार पर गोबर गोमूत्र से उत्पादों को बनाना चाहिए।               माता जी गौशाला बरसाना मथुरा से पधारे श्री केशव सद्रश   ने  कहा कि गाय को हम माँ तो कहते हैं लेकिन उसके साथ व्यवहार हमारा एक पशु जैसा भी नहीं है। यह बहुत ही अशोभनीय है। आज गौ मां हमको बहुत कुछ देने के लिए तत्पर हैं लेकिन हम उनके पुत्र कहलाने लायक नहीं है ।           कर्नाटक से पधारे डॉक्टर रामू कुंडू राव ने बताया की गाय के गोमूत्र से हम काफी मात्रा में जीवामृत बना सकते हैं और उस जीवामृत को गांव के किसानों को ₹5 से ₹10 लीटर तक बिक्री किया जा सकता है ।किसान उसमें प्रति लीटर 10 लीटर पानी मिलाकर 1 एकड़ खेत में डाल सकता है ।उपज भी अच्छी होगी और बीमारी भी नहीं लगेगी। इसे प्रत्येक किसान बना भी सकता है और बना हुआ मोल भी ले सकता है। हजारों लीटर जीवामृत गांव में बनाया जा सकता है । जिसको बिक्री आदि करने में युवाओं की बहुत बड़ी भूमिका हो सकती है । उन्होंने कहा कि करनाटक  में  अभी भी बैल से खेती हो रही है।             इसी क्रम में नागपुर से पधारे डॉ श्रीराम सिंह ने कहा कि गो आधारित खेती आज भारत के किसानों की पसंद बनने जा रही है ।उन्होंने बताया कि  हम देश के अनेक लोगों के बड़े-बड़े फार्म गो आधारित खेती के रूप में संभालने का काम कर रहे हैं। जिसमें भारत के केंद्रीय मंत्री आदरणीय नितिन गडकरी जी का भी उनके गाव का फार्म है।उसका उत्पाद बड़े-बड़े शहरों में विक्रय केंद्र बनाकर किया जा रहा है। उत्पाद के मूल्य भी अच्छे मिल रहे हैं। पूरे देश में आर्गेनिक कमयूनिटी खड़ी हो रही है जो केवल ऑर्गेनिक उत्पादों को महत्व दे रही है।आगे आने वाला युग ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग का युग होगा ।जरूरत है कि किसान अपनी खेती में उत्पादन जैविक रूप से प्रारंभ करें ।गौ माता हमको गोबर गोमूत्र के रूप में अमृत प्रदान करती है ।हम उसका अधिक से अधिक उपयोग खेती में कर आय बढ़ाएं ।                 कच्छ गुजरात में जन्मे और मुंबई को अपना कर्म क्षेत्र बनाए हुए डॉ शैलेश भिंडे ने बताया कि उनकी एक गौशाला ठाणे जिले में है। जिसमें 8 0 गोवंश है  । वहाँ हम 200 प्रकार के उत्पाद बना रहे हैं ।जिसमें कॉस्मेटिक सामग्री ज्यादा से ज्यादा बनाई जा रही है। साबुन शैंपू  बॉडी लोशन फेस पैक इस प्रकार के उत्पादनों  के साथ अनेक प्रकार की औषधियां भी बना रहे हैं।   पूरे देश में इस प्रकार का एक नेटवर्क धीरे-धीरे खड़ा हो रहा है जो संपूर्ण चिकित्सा गो औषधियों से करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा उत्तर प्रदेश भी इस क्षेत्र में आगे बढ़े ऐसा हमारा प्रयास है ।उत्तर प्रदेश की भी शुरुआत शाहजहांपुर नगरी से करने के लिए हम गत तीन दिनों से विनोबा सेवा आश्रम में अनेक लोगों के साथ चर्चाएं कर रहे हैं। उन्होंने जनपद् शाहजहाँपुर के जिलाधिकारी श्री इंद्र विक्रम सिंह के गो  संबर्धन पर सुझावों और प्रयासों की सराहना की।                    डॉ यशवंत मैथिल ने संपूर्ण कार्यक्रम की योजना बनाई है जिसमें शाहजहांपुर लखीमपुर हरदोई सीतापुर होते हुए लखनऊ पहुंचेंगे वहां पर प्रदेश के लिए व्यापक योजना बनाने का विचार है जिसमें देश के अनेक गो वैज्ञानिक अपनी अपनी राय देंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नैमिषारन्य  सीतापुर के महाराज तथा गोरक्षा परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष स्वामी पद्मनाभ ने करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने तात्कालिक व्यवस्था करते हुए गायों को  आश्रय स्थल तक पहुंचाया है। वह काम सराहनीय है। लेकिन हमें आगे चलकर गाय को अपने घर पर ही पहुंचाना होगा। उसके लिए हम संपूर्ण प्रदेश में रणनीति बनाने का काम कर रहे हैं ।मुझे खुशी है कि इसकी शुरुआत  आचार्य विनोबा जी के आश्रम से हो रही है। हम सब जानते हैं कि विनोबाजी का समर्पण गाय के प्रति बहुत रहा है ।और समाज में गाय के प्रति श्रद्धा पैदा करने का काम ऐसी ही समाज सेवी संस्थाएं कर सकेंगीं। अगर समाज तय कर लेगा कि हमको अपनी गाय अपने द्वार पर चाहिए तो निश्चित ही वह दिन दूर नहीं जब गौ मां  स्वाभिमान का जीवन जी सकेगी।उन्होंने आवाहन किया कि समाज के प्रत्येक लोग इस गौ माता के घर वापसी अभियान में जूड़ें। ताकि गांव समृद्ध और गाय समृद्ध बन सके। इससे पूर्व विनोवा गो सेवा सदन का भ्रमण अतिथियों को अमर सिंह जी ने कराया ।वहाँ वैज्ञानिकों ने विनोवा गो सेवा सदन को अनेक सुझाव देकर गौशाला को स्वाबलंबी बनाने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर अमित सिंह,राजेश शर्मा कृष्ण पा सिंह परिवार परामर्श केंद्र की अल्पना रायजादा,मुदित् कुमार, कमला सिंह,ओम प्रकाश वर्मा,अखलाक खाँ,बिंद्रा बाबू, ने प्रतिभाग किया।अंत में आभार श्री मोहित कुमार ने देते हुए कहा के गाय के गोबर और गोमूत्र से बने उत्पादों को बिक्री के लिए युवाओं की एक टीम खड़ी की जा रही है। जो गांव गांव तक पहुंच कर इसके बारे में समझाएं  भी और किसान हित में उसकी बिक्री भी करेगें। संपूर्ण कार्यक्रम को आशीर्वाद विनोबा विचार प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक रमेश भैया का भी आशीर्वाद मिला। समापन प्रार्थना से हुआ।

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