-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अनधिकृत कीटनाशकों की बिक्री पर क्रॉपलाइफ इंडिया की चिंता
नियमों के प्रभावी पालन के लिए सरकार-उद्योग के साझा ढांचे की मांग
Lucknow : क्रॉपलाइफ इंडिया, 17 अनुसंधान एवं विकास आधारित फसल संरक्षण कंपनियों का संगठन, ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अनधिकृत फसल संरक्षण उत्पादों की बिक्री को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि ऑनलाइन कीटनाशक बिक्री में नियामक निगरानी, नियमों का पालन और जवाबदेही को तत्काल मजबूत करने की जरूरत है। क्रॉपलाइफ इंडिया ने यह भी कहा कि जब सरकार ड्राफ्ट पेस्टीसाइड्स मैनेजमेंट बिल, 2025 के तहत कीटनाशक कानूनों की समीक्षा कर रही है, तब ऑनलाइन बिक्री से जुड़े नए जोखिमों को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
यह मुद्दा नई दिल्ली में आयोजित क्रॉपलाइफ इंडिया के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर फसल संरक्षण उत्पादों की बिक्री विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन में उठाया गया। सम्मेलन में नीति-निर्माता, नियामक, उद्योग प्रतिनिधि और अन्य हितधारक शामिल हुए। चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि कृषि-इनपुट्स की बिक्री तेजी से ऑनलाइन हो रही है और किसानों तथा आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा के लिए क्या नियम जरूरी हैं।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि आयुक्त, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के डॉ. पी. के. सिंह ने कहा कि जब खतरनाक कृषि-इनपुट्स ऑनलाइन बेचे जाते हैं, तब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स द्वारा केवल विक्रेताओं के जीएसटी जैसे बुनियादी दस्तावेज जांचना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने गुणवत्ता जांच, उत्पाद की पहचान और आपूर्ति श्रृंखला की जवाबदेही को मजबूत करने की जरूरत बताई और कहा कि इन बातों पर पेस्टीसाइड्स मैनेजमेंट बिल, 2025 के तहत ध्यान दिया जाना चाहिए।
केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIB&RC) के सचिव डॉ. सुभाष चंद ने कहा कि डिजिटलीकरण और ई-कॉमर्स ग्रामीण भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके साथ नए जोखिम भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि कीटनाशक खतरनाक उत्पाद हैं और जैसे-जैसे ऑनलाइन बिक्री बढ़ेगी, गुणवत्ता, नियमों का पालन और किसान सुरक्षा की जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म्स और निर्माताओं—दोनों की होगी।
ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) के कृषि डोमेन लीड श्री रवि शंकर ने कहा कि बेहतर जानकारी, सही विवरण और ट्रेसबिलिटी से किसानों को असली उत्पाद पहचानने में मदद मिलेगी और नकली या गलत उत्पादों का जोखिम कम होगा।
क्रॉपलाइफ इंडिया के चेयरमैन श्री अंकुर अग्रवाल ने कहा, “हम ई-कॉमर्स पर कीटनाशकों की बिक्री के खिलाफ नहीं हैं। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियम और उनके पालन की व्यवस्था डिजिटल व्यापार के अनुरूप हों। अनधिकृत उत्पादों को रोकना सरकार और उद्योग—दोनों की साझा जिम्मेदारी है। यह किसानों की सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं के भरोसे के लिए जरूरी है। इस सम्मेलन का उद्देश्य सभी पक्षों के साथ मिलकर मौजूदा कमियों को दूर करने के उपाय तलाशना है।”
क्रॉपलाइफ इंडिया ने बताया कि फसल संरक्षण उत्पादों की बिक्री और वितरण कीटनाशक अधिनियम, 1968 और कीटनाशक नियम, 1971 के तहत नियंत्रित होती है। इन नियमों के अनुसार, कीटनाशक केवल लाइसेंस प्राप्त विक्रेता ही बेच सकते हैं, वह भी उन्हीं उत्पादों के लिए जो उनके लाइसेंस पर दर्ज हों, तय भौगोलिक क्षेत्र में और निर्माता या आयातक द्वारा जारी वैध प्रिंसिपल सर्टिफिकेट के साथ। इन नियमों का उद्देश्य पूरी आपूर्ति श्रृंखला में उत्पाद की असलियत और जिम्मेदारी तय करना है।
हालांकि, मौजूदा व्यवस्था में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को कीटनाशक कानून के तहत अलग से लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं है। न ही उन पर यह साफ जिम्मेदारी है कि वे यह जांचें कि ऑनलाइन बेचे जा रहे उत्पाद विक्रेता के लाइसेंस में शामिल हैं या उनके साथ वैध प्रिंसिपल सर्टिफिकेट है। इससे एक ऐसा खालीपन बनता है, जहां बिना साफ जवाबदेही के कीटनाशकों की ऑनलाइन बिक्री हो सकती है और किसानों तक अनधिकृत उत्पाद पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।
संगठन ने बताया कि कीटनाशक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर मार्केटप्लेस और इन्वेंट्री-आधारित—दोनों तरीकों से बेचे जा रहे हैं। इन्वेंट्री-आधारित मॉडल में कीटनाशकों का भंडारण और वितरण ऐसे गोदामों से हो सकता है, जिनके पास कीटनाशक नियमों के तहत लाइसेंस नहीं होता, जबकि ऑफलाइन बिक्री में ऐसे काम के लिए लाइसेंस जरूरी है। इससे निगरानी कमजोर होती है और जांच व ट्रेसबिलिटी मुश्किल हो जाती है।
क्रॉपलाइफ इंडिया ने साफ किया कि कीटनाशक नियमों में 2022 में जोड़ा गया नियम 10E ऑनलाइन या घर-घर डिलीवरी की अनुमति देता है, लेकिन यह लाइसेंस, प्रिंसिपल सर्टिफिकेट, स्वीकृत परिसर या भौगोलिक सीमाओं से जुड़े मौजूदा नियमों को खत्म नहीं करता। संगठन के अनुसार, कुछ मामलों में इस नियम की गलत समझ के कारण यह माना गया कि ऑनलाइन बिक्री के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं है, जिससे अनधिकृत बिक्री को बढ़ावा मिला है।
वर्तमान में निरीक्षण और जांच मुख्य रूप से लाइसेंस प्राप्त दुकानों पर होती है। इसके मुकाबले, ई-कॉमर्स के गोदामों और ऑनलाइन आपूर्ति श्रृंखला में होने वाली गतिविधियां अक्सर नियमित जांच से बाहर रह जाती हैं। इससे समस्या सामने आने पर जिम्मेदारी तय करना और समय पर कार्रवाई करना कठिन हो जाता है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि ड्राफ्ट पेस्टीसाइड्स मैनेजमेंट बिल, 2025 नियामक व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास करता है, लेकिन इसमें ई-कॉमर्स से जुड़ी कुछ अहम बातों को साफ तौर पर शामिल नहीं किया गया है। इनमें प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी, इन्वेंट्री-आधारित मॉडल में लाइसेंस की जरूरत और ऑनलाइन आपूर्ति श्रृंखला में डिजिटल ट्रेसबिलिटी शामिल हैं। संगठन इन सभी मुद्दों पर अपने सुझाव औपचारिक परामर्श प्रक्रिया के तहत देगा।
उन्होंने आगे कहा, “डिजिटल व्यापार एक जरूरी और तेजी से बढ़ता माध्यम है। आगे का रास्ता यह है कि इसे सही नियमों के साथ बढ़ने दिया जाए। जैसे-जैसे बिक्री के तरीके बदलते हैं, वैसे-वैसे नियम और उनके पालन की व्यवस्था भी

