यूजीसी बिल को लेकर जनप्रतिनिधि ‘अंधे कानून’ बनकर बैठे हैं, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा: प्रवीण तिवारी

यूजीसी बिल को लेकर जनप्रतिनिधि ‘अंधे कानून’ बनकर बैठे हैं, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा: प्रवीण तिवारी

यूजीसी बिल के विरोध में सवर्ण आर्मी ने किया प्रदर्शन डीएम को सौंपा ज्ञापन
जौनपुर ,27 जनवरी।यूपी के जौनपुर स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार को सवर्ण आर्मी के हजारों कार्यकर्ताओं ने यूजीसी कानून के विरोध में प्रदर्शन किया। उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र को सौंपा।
इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रवीण तिवारी ने बताया कि यह यूजीसी बिल को समाप्त करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आए दिन आरक्षण और जाति के आधार पर समाज को बांट रही है, और इसी तरह का नियम यूजीसी में भी लागू किया गया है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। तिवारी ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि ‘अंधे कानून’ बनकर बैठे हैं, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनकी प्रमुख मांग है कि यूजीसी के इस बिल को वापस लिया जाए।

बरेली के एसडीएम अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे पर प्रवीण तिवारी ने कहा कि उन्होंने वह काम किया है जो देश के विधायकों, सांसदों और नेताओं को करना चाहिए। उन्होंने अग्निहोत्री के इस्तीफे को पूरे देश और समाज के लिए एक सीख बताया, जो यह दर्शाता है कि वे अपने समाज के नौजवान साथियों के साथ खड़े हैं।

जगतगुरु शंकराचार्य से जुड़े प्रयागराज की घटना को निंदनीय बताते हुए तिवारी ने कहा कि यदि शंकराचार्य से उनकी योग्यता का प्रमाण मांगा जा रहा है, तो देश के प्रधानमंत्री उनके पैर छूने क्यों गए थे? उन्होंने सवाल उठाया कि उत्तर प्रदेश के तमाम सांसद और विधायक उनसे पूजा क्यों करवाते हैं, और यदि आज सरकार प्रमाण मांग रही है, तो एक साल पहले ये लोग कहां थे। उन्होंने इसे बिल्कुल गलत बताते हुए इसका घोर विरोध किया।

सवर्ण आर्मी ने चेतावनी दी कि यह प्रदर्शन पहले जनपद स्तर पर है, फिर प्रदेश स्तर पर होगा। यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे देश स्तर पर ज्ञापन देने के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन करेंगे। तिवारी ने यह भी कहा कि सांसद और विधायक इस मुद्दे पर इसलिए नहीं बोल रहे हैं क्योंकि उनके बच्चे यूनिवर्सिटी में नहीं पढ़ते हैं।

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