सोनू त्यागी ने अध्यात्म के साथ खोली बॉलीवुड और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की सच्चाई, हैश ब्राउन कन्वर्सेशन्स में बोले – “सफलता कई बार लक बाय चांस होती है”

सोनू त्यागी ने अध्यात्म के साथ खोली बॉलीवुड और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की सच्चाई, हैश ब्राउन कन्वर्सेशन्स में बोले – “सफलता कई बार लक बाय चांस होती है”

मुंबई: सोनू त्यागी हैश ब्राउन कन्वर्सेशन्स में पॉडकास्ट होस्ट निहारिका पांडे के साथ अपनी 56 मिनट की बेबाक बातचीत को लेकर चर्चा में हैं। यह पूरा एपिसोड अब लाइव हो चुका है और इसे वर्ष 2026 की अब तक की सबसे ईमानदार, निडर और सच्चाई सामने रखने वाली इंडस्ट्री बातचीत माना जा रहा है।

अवॉर्ड प्राप्त लेखक, निर्देशक, निर्माता और एप्रोच एंटरटेनमेंट ग्रुप तथा गो स्पिरिचुअल के संस्थापक सोनू त्यागी ने इस संवाद में बॉलीवुड, एंटरटेनमेंट कारोबार, विज्ञापन, जनसंपर्क, मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अध्यात्म जैसे विषयों पर खुलकर और साफ शब्दों में अपनी बात रखी है।

बातचीत की शुरुआत में ही सोनू त्यागी एक कड़वी लेकिन सच्ची हकीकत सामने रखते हैं। वे कहते हैं,
“यह लक बाय चांस है। पूरी फिल्म इंडस्ट्री केवल टैलेंट पर नहीं चलती। ज़्यादातर मामलों में सफलता किस्मत और मौके पर निर्भर करती है। कई बार ऐसे लोग भी आगे बढ़ जाते हैं जिनमें खास प्रतिभा नहीं होती।”
उनका यह बयान फिल्म इंडस्ट्री में सफलता को लेकर बनी आम धारणाओं को चुनौती देता है।

इस बातचीत में सोनू त्यागी बताते हैं कि केवल मेहनत और प्रतिभा से ही हमेशा सफलता नहीं मिलती। उनके अनुसार इंडस्ट्री में सही समय, सही संपर्क और सही मौका कई बार टैलेंट से ज़्यादा अहम हो जाता है, जबकि सच्चे और मेहनती कलाकार वर्षों तक संघर्ष करते रहते हैं। वे मानते हैं कि इस सच्चाई को समझना नए कलाकारों के लिए ज़रूरी है, ताकि वे भ्रम में न रहें और मानसिक रूप से मजबूत बन सकें।

विज्ञापन, जनसंपर्क और मीडिया इंडस्ट्री पर बात करते हुए सोनू त्यागी मौजूदा व्यवस्था की खामियों पर भी रोशनी डालते हैं। वे कहते हैं कि पेड खबरें, फर्जी प्रचार और दिखावटी ब्रांडिंग ने मीडिया की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। उनका मानना है कि ईमानदारी केवल एक नैतिक गुण नहीं, बल्कि लंबे समय तक टिके रहने की सबसे मजबूत नींव है।

सोनू त्यागी के शब्दों में,
“ईमानदारी जीवन में बहुत मूल्यवान है। अगर हम मानवता और अध्यात्म की बात करें और केवल पैसा कमाने के लिए कुछ भी करने लगें, तो वह सही नहीं है।”

वे एजेंसियों और ब्रांड्स को यह सलाह भी देते हैं कि दिखावे और शॉर्टकट की जगह सच्चे मीडिया संबंधों, भरोसेमंद पहचान और वास्तविक डिजिटल रणनीतियों पर ध्यान देना चाहिए, खासकर युवा पीढ़ी के लिए, जो सच्चाई और पारदर्शिता को ज्यादा महत्व देती है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चर्चा करते हुए सोनू त्यागी भविष्य की एक गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। उनका मानना है कि आने वाले पाँच से दस वर्षों में यह तकनीक संगीत निर्माण, आवाज़ रिकॉर्डिंग, कलाकार चयन, पटकथा में सहायता, विज्ञापन की रचनात्मक प्रक्रिया और प्रोडक्शन के कई हिस्सों को अपने हाथ में ले लेगी। वे कहते हैं कि इससे रचनात्मक क्षेत्र में नौकरियां कम हो सकती हैं, हालांकि इंसानी संवेदनशीलता और सोच की भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं होगी।

इस पूरी बातचीत का सबसे भावनात्मक और गहरा पहलू अध्यात्म है। सोनू त्यागी मानते हैं कि आज के अत्यधिक तनाव और प्रतिस्पर्धा वाले दौर में अध्यात्म ही इंसान को संतुलन और शांति देता है। वे कहते हैं,
“अगर आप आध्यात्मिक हैं, तो आप सच्चे इंसान हैं। अगर आपमें मानवता है, तो आप आध्यात्मिक हैं। अध्यात्म और मानवता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।”

वे बताते हैं कि धर्म, करुणा, अहिंसा और नैतिक जीवन जैसे मूल्य उनके निजी और पेशेवर जीवन की दिशा तय करते हैं।

सोनू त्यागी इस पॉडकास्ट में गो स्पिरिचुअल की शुरुआत की कहानी भी साझा करते हैं। वे बताते हैं कि वर्ष 2010 में इस विचार की नींव रखी गई थी और 2017 में इसे औपचारिक रूप से शुरू किया गया। गो स्पिरिचुअल का उद्देश्य भारतीय अध्यात्म और सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों को केवल बातों तक सीमित न रखकर व्यवहार में उतारना है।

आने वाले समय में गो स्पिरिचुअल न्यूज़ मैगज़ीन और ऐप के माध्यम से सकारात्मक, सच्ची और मूल्य आधारित पत्रकारिता को बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि गो स्पिरिचुअल वेब टीवी

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