27 जनवरी- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
प्रान प्रान के जीव के जिव
सुख के सुख राम ।
तुम्ह तजि तात सोहात गृह
जिन्हहि तिन्हहि बिधि बाम ।।
( अयोध्याकाण्ड, दो. 290)
राम राम जी🙏🙏
श्री जनक जी मिथिला समाज के साथ चित्रकूट आए हुए हैं , सबसे मिलते हैं । कुछ दिन बीतने के बाद श्री राम जी पूज्य बशिष्ठ जी के पास जाते हैं और कहते हैं कि गुरुदेव ! भैया भरत, अयोध्यावासी , माताएँ व श्री जनक जी मिथिला समाज के साथ यहाँ आकर कष्ट पा रहें हैं , ऐसे में जो उचित हो आप कुछ कीजिए । गुरुदेव वशिष्ठ जी कहते हैं कि हे राम ! आप प्राणों के प्राण, जीवों के जीव और सुखों के भी सुख हो । आपको छोड़कर जिसे घर भाता हो तो समझो विधाता उसके विपरीत है ।
आत्मीय जन ! श्री राम जी के साथ रहकर श्री राम जी में मन न लगे तो समझना चाहिए कि विधाता हमारे विपरीत है । श्री राम जी का साथ है तो हमारे जीवन में सब कुछ है । विधाता भी उसी के अनुकूल है जो श्री राम जी के अनुकूल है।अतएव श्री राम जी से प्रेम करें। अस्तु….. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

