हीरक जयंती पर ‘वॉक फॉर हर’—1090 चौराहे से बेटियों के सशक्तिकरण का सशक्त संदेश 

हीरक जयंती पर ‘वॉक फॉर हर’—1090 चौराहे से बेटियों के सशक्तिकरण का सशक्त संदेश

ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय

लखनऊ।

सैनिक स्कूल घोड़ा खाल के 60 वर्ष (1966–2026) पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित हीरक जयंती समारोह के अंतर्गत पूर्व छात्र संगठन द्वारा आज प्रातः 7 बजे लखनऊ के 1090 चौराहे पर “वॉक फॉर हर” अभियान के तहत एक भव्य वॉकाथन का आयोजन किया गया।

इस प्रेरणादायी वॉकाथन का आयोजन पूर्व छात्र संगठन के महामंत्री श्री विनोद सिंह के नेतृत्व में सैनिक स्कूल घोड़ा खाल के समस्त पूर्व छात्रों के सहयोग से किया गया। देश-विदेश से आए पूर्व छात्रों ने पूरे अनुशासन, उत्साह और गर्व के साथ सहभागिता कर आयोजन को गरिमामय एवं प्रभावशाली बनाया।

“वॉक फॉर हर” अभियान का प्रमुख उद्देश्य समाज, अभिभावकों एवं बालिकाओं के बीच यह जागरूकता फैलाना रहा कि अब सैनिक स्कूलों में बालिकाओं का भी स्वागत है, जहाँ उन्हें शिक्षा, अनुशासन, नेतृत्व विकास एवं राष्ट्र सेवा हेतु समान अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। यह पहल भविष्य की सशक्त, आत्मनिर्भर एवं नेतृत्वकारी बेटियों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

वॉकाथन के दौरान छात्र एवं छात्राएँ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हुए दिखाई दिए, जो समानता, साहस, समावेशन और सशक्त राष्ट्र निर्माण का सशक्त प्रतीक बना।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) वी. एम. कालिया रहे। इस अवसर पर आयुक्त आयकर श्री विक्रांत पाल सिंह, माननीय न्यायाधीश श्री ज्ञानेंद्र राव, माननीय न्यायाधीश श्री ध्रुव राय, श्री राजेश गुप्ता, श्री संजीव कुमार सिंह तथा श्री अजय सिंह (उप आयुक्त, जीएसटी) सहित प्रशासनिक, न्यायिक एवं सामाजिक क्षेत्र की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने सहभागिता कर अभियान को अपना समर्थन प्रदान किया।

कार्यक्रम में श्री विभव श्रीवास्तव ने आयोजन सचिव के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा स्वयं भी वॉकाथन में भाग लिया। वरिष्ठ पूर्व छात्र कर्नल अखिला नंद पांडेय की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष सम्मान प्रदान किया।

इसके अतिरिक्त कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, चिनहट एवं सरोजिनी नगर की छात्राओं ने पूरे जोश, आत्मविश्वास और ऊर्जा के साथ भाग लेकर “वॉक फॉर हर” अभियान को और अधिक सशक्त एवं प्रेरणादायी बना दिया।

यह आयोजन न केवल सैनिक स्कूल घोड़ा खाल की गौरवशाली परंपरा का उत्सव रहा, बल्कि बेटियों के सशक्तिकरण और समावेशी भविष्य के प्रति समाज की सामूहिक प्रतिबद्धता का भी सशक्त

  1. संदेश बना।

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