मीडिया वर्कशॉप के साथ अयोध्या में फाइलेरिया उन्मूलन की मुहिम हुई तेज, सीएमओ ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस
अयोध्या (डी के यू लाइव ब्यूरो चीफ) सुरेंद्र कुमार।अयोध्या, 3 फरवरी 2026: राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जनपद के तारुन और मयाबजार विकासखंडों में 10 से 28 फरवरी तक सामूहिक दवा सेवन अभियान चलाया जाएगा। दोनों ब्लॉकों की कुल लक्षित आबादी लगभग 4.93 लाख है। अभियान के लिए 87 सुपरवाइजर और 495 टीमें गठित की गई हैं जो घर-घर जाकर पात्र व्यक्तियों को अपने सामने दवा सेवन कराएंगी। सभी ग्राम पंचायतों में अभियान का शुभारंभ जनप्रतिनिधियों द्वारा स्वयं दवा सेवन कर लोगों को प्रेरित करते हुए किया जाएगा।
यह जानकारी मंगलवार को सीएमओ सभागार में आयोजित मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में सीएमओ डॉ. देवेन्द्र कुमार भिटौरिया ने दी। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन की सबसे बड़ी चुनौती लोगों की फाइलेरिया से बचाव की दवा सेवन में संकोच और भ्रांतियाँ हैं। कई लोग स्वयं को स्वस्थ समझकर दवा सेवन से इनकार कर देते हैं या दुष्प्रभाव की भ्रांति से पीछे हट जाते हैं। मीडिया सही सूचना और भरोसा देकर लोगों को दवा सेवन के लिए प्रेरित कर सकता है।
सीएमओ ने बताया कि फाइलेरिया केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं बल्कि सामाजिक-आर्थिक संकट भी है। जनपद में वर्तमान में 1334 हाथीपांव और 11 हाइड्रोसील मरीज पंजीकृत हैं। यह बीमारी व्यक्ति को आजीवन कमजोर बना देती है जिससे पूरे परिवार की आजीविका प्रभावित होती है।
टीम की निगरानी में खिलाई जाएगी दवा –
एसीएमओ एवं बीवीडी नोडल अधिकारी डॉ. पीसी भारती ने बताया कि हालिया नाइट ब्लड सर्वे में तारुन और मयाबजार संवेदनशील पाए गए हैं। इसलिए यहां की आबादी को फाइलेरिया से बचाव के लिए 12.32 लाख डीईसी, 12.32 लाख आइवरमेक्टिन और 4.93 लाख एल्बेंडाजोल टैबलेट राज्य मुख्यालय से उपलब्ध कराई गई हैं। गर्भवती महिलाओं, दो वर्ष से छोटे बच्चों और गंभीर रोगियों को छोड़कर सभी को दवा स्वास्थ्य कर्मियों के सामने खिलाई जाएगी ताकि संक्रमण की श्रृंखला टूट सके।
सुरक्षित हैं दवाएं –सीफार के प्रतिनिधि ने बताया कि फाइलेरिया एक लाइलाज बीमारी है, जिसके सूक्ष्म कृमि मच्छरों द्वारा दूसरों में फैलते हैं। इसके लक्षण कई वर्षों बाद हाथ-पैर या जननांगों में सूजन के रूप में दिखते हैं। इससे बचाव की दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और डबल्यूएचओ से प्रमाणित हैं। दवा सेवन के बाद हल्का बुखार या चक्कर आना सामान्य है ऐसा सूक्ष्म कृमियों के नष्ट होने के कारण होता है और जल्द ठीक हो जाता है। गंभीर स्थिति के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीम रहेगी। उन्होंने कहा कि दवा न लेना सबसे बड़ा खतरा है, क्योंकि एक संक्रमित व्यक्ति से अनजाने में उसके साथ साथ पूरे गांव में संक्रमण फैल सकता है।
जिला मलेरिया अधिकारी मंजुला आनंद ने बताया कि प्रशिक्षण, अंतरविभागीय समन्वय और ब्लॉक टास्क फोर्स का गठन पूरा हो चुका है। पीसीआई और सीफार प्रतिनिधियों ने मीडिया से अपील की कि वे लोगों तक यह संदेश पहुँचाएँ कि फाइलेरिया दवा से रोका जा सकता है और दवा न न सेवन करने पर यह पीढ़ियों की समस्या बनी रह सकती है।
इस मौके पर एसीएमओ डॉ आशुतोष श्रीवास्तव, डिप्टी सीएमओ डॉ पी के गुप्ता, डॉ दीपक पांडे , डीएचईआईओ डीपी सिंह सहित जनपद के कई मीडिया साथी मौजूद रहे।

