गो रक्षा को लेकर अयोध्या में विश्व सनातन कल्याण संघ की गोष्ठी, सनातन मूल्यों पर दिया गया जोर
अयोध्या धाम (डीकेयू लाइव ब्यूरो चीफ) सुरेंद्र कुमार। विश्व सनातन कल्याण संघ का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म के शाश्वत मूल्यों की रक्षा, प्रचार-प्रसार एवं व्यावहारिक स्थापना के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक उत्थान लाना है। संघ एक सशक्त, आत्मनिर्भर एवं संस्कारित हिंदू समाज के निर्माण के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रहा है। संघ के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में “गो रक्षा” जैसे गंभीर विषय पर अपने विचार रखते हुए संघ के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय दादा अयोध्यावासी ने कहा कि गौ माता सनातन संस्कृति की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि विश्व सनातन कल्याण संघ का एक प्रमुख उद्देश्य गो हत्या पर रोक, गो तस्करी के विरुद्ध जन-जागरूकता तथा गोवंश की रक्षा के लिए सामाजिक एवं प्रशासनिक स्तर पर सतत प्रयास करना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गौ माता केवल एक पशु नहीं, बल्कि मातृत्व और समृद्धि का प्रतीक हैं। संघ धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ युवाओं में धर्म, राष्ट्र और सेवा की भावना विकसित करने हेतु निरंतर सक्रिय है। संघ के वरिष्ठ राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सिद्धार्थ भट्टाचार्य ने कहा कि “गो रक्षा” के साथ-साथ संघ “गो सेवा” को भी अपना पवित्र कर्तव्य मानता है। इसके अंतर्गत संघ की विभिन्न शाखाओं एवं सनातनी युवाओं द्वारा देश के अलग-अलग प्रदेशों में गोशालाओं की स्थापना एवं सहयोग, गो रक्षा कार्यों में पुलिस-प्रशासन के साथ समन्वय, तथा बीमार, वृद्ध एवं निराश्रित गौवंश की सेवा का कार्य निष्ठा से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संघ का दृढ़ विश्वास है कि सटीक शिक्षा, संस्कार, नैतिक मूल्यों, धर्म ज्ञान और भारत के वास्तविक इतिहास का सम्यक ज्ञान ही समाज परिवर्तन की मजबूत नींव है। इसी उद्देश्य से आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा में सहायता हेतु संघ निरंतर प्रयासरत है। संघ की महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष मा. बविता शर्मा ने कहा कि प्राचीन मंदिर हमारी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर हैं। संघ का एक प्रमुख लक्ष्य जीर्ण-शीर्ण एवं उपेक्षित मंदिरों का जीर्णोद्धार, नियमित पूजा-पाठ एवं धार्मिक गतिविधियों की पुनः स्थापना करना है। उन्होंने कहा कि मंदिरों को सामाजिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से जुड़ी रह सकें।

