रामचरितमानस की भाव सहित

4 फरवरी : रामचरितमानस की भाव सहित
नमो राघवाय 🙏

सत्य कहहिं कबि नारि सुभाऊ।
सब बिधि अगहु अगाध दुराऊ।।
निज प्रतिबिंबु बरुकु गहि जाई।
जानि न जाइ नारि गति भाई ।।
( अयोध्याकाण्ड 46/4)
राम राम जी🙏🙏
कैकेइ ने राजा से दो वरदान माँग लिए हैं। श्री राम जी कौसल्या माँ से अनुमति लेने गये हैं । पूरे अयोध्या में बात फैल गई है, सब कैकेई को बुरा कह रहें हैं । लोग कह रहें हैं कि स्त्री का स्वभाव अथाह व पकड़ के बाहर है । अपनी परछाहीं भले ही पकड़ में आ जाए पर स्त्रियों की गति समझ से परे है ।
बंधुवर ! अपना मन व मस्तिष्क श्री राम जी की गति समझने में लगाएँ, जिसे श्री राम जी के स्वभाव का पता चल गया उसके लिए सब अनुकूल हो जाते है । कोई अगम व अगाध नहीं रहता है , सब सुगम व सरल हो जाते हैं । अतः ! सब छोड़, श्री राम जी को अपने से जोड़िए, इसके लिए केवल श्री सीताराम नाम का निरन्तर भजन करते रहिए। अथ…..श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम ।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

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