स्वस्थ जीवन के लिए व्यवहार में बदलाव जरूरी : डॉ. तरुण शंकर
एसआरएमयू में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, तनाव को बताया बड़ी चुनौती
लखनऊ। बदलती जीवनशैली, फास्ट-फूड संस्कृति और बढ़ते मानसिक तनाव के बीच स्वस्थ जीवन के लिए व्यवहार में बदलाव अनिवार्य है। यह बात श्री रामस्वरुप मेमोरियल यूनिवर्सिटी (एसआरएमयू) के सीएसआईएस विभाग द्वारा आयोजित स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कही।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नई दिल्ली एमसीडी के मेडिकल ऑफिसर डॉ. तरुण शंकर ने कहा कि आज लोग इलाज पर अधिक और स्वास्थ्य प्रबंधन पर कम ध्यान दे रहे हैं, जबकि संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और स्वच्छ आदतें अनेक बीमारियों से बचाव में सहायक हैं। उन्होंने फास्ट-फूड संस्कृति को स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि खान-पान और दिनचर्या में सुधार किए बिना स्वस्थ जीवन की कल्पना संभव नहीं है।
डॉ. तरुण शंकर ने वर्तमान समय में मानसिक तनाव को एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि कार्यस्थल का दबाव, अनियमित जीवनशैली, अत्यधिक मोबाइल उपयोग और नींद की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। उन्होंने तनाव से निजात के लिए योग, ध्यान, प्राणायाम, नियमित व्यायाम, समय प्रबंधन और सकारात्मक सोच अपनाने की सलाह दी।
सहारनपुर केंद्रीय स्वास्थ्य योजना के इंचार्ज सीएमओ डॉ. शुभम दिवाकर ने कहा कि भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वास्थ्य की उपेक्षा समाज के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और व्यक्तिगत जिम्मेदारी ही बेहतर जीवन और स्वस्थ समाज की नींव है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर बिनीत कुमार गुप्ता ने कहा कि स्वस्थ शरीर के साथ मानसिक संतुलन और सकारात्मक दृष्टिकोण जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाते हैं। कार्यक्रम का संचालन इंजीनियर कार्तिकेश तिवारी एवं इंजीनियर जुलियस कुमार ने किया।इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन:
एसआरएमयू में आयोजित स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते अतिथि।

