केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में तैनात निरीक्षकों के पदों का भविष्य अधर में, न्यायोचित हस्तक्षेप की उठी मांग

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में तैनात निरीक्षकों के पदों का भविष्य अधर में, न्यायोचित हस्तक्षेप की उठी मांग

(राजेश श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ)

अयोध्या।केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल मे तैनात निरीक्षकों का भविष्य अधर में दिखाई दे रहा है जिसके चलते इस विभाग में तैनात निरीक्षक हतोत्साहित दिखाई दे रहे हैं। बताते चले कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल देश की आंतरिक तरिक सुरक्षा व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी मानी जाती है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, आतंकवाद-रोधी अभियानों और कानून व्यवस्था की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान और अधिकारी लगातार मोर्चा संभाले हुए हैं।देखा जाये तो इस पूरी व्यवस्था में निरीक्षक स्तर के अधिकारी फील्ड नेतृत्व की रीढ़ होते हैं।लेकिन हालिया कैडर रिव्यू प्रस्तावों और पदोन्नति प्रक्रिया में आ रही बाधाओं के कारण निरीक्षक संवर्ग का भविष्य गंभीर संकट में नजर आ रहा है। निरीक्षक न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाते हैं, बल्कि फील्ड में जवानों का नेतृत्व करते हुए कठिन परिस्थितियों में निर्णय भी लेते हैं। इसके बावजूद वर्तमान समय में निरीक्षक संवर्ग अपने कैरियर विकास को लेकर गहरी निराशा और असंतोष से गुजर रहा है। बल के भीतर यह भावना प्रबल होती जा रही है कि वर्षों की सेवा और समर्पण के बाद भी उन्हें उनका उचित हक नहीं मिल पा रहा है।वर्ष 2019 में लागू किए गए ग्रुप ‘B’ कैडर रिव्यू को प्रारंभ में एक सकारात्मक कदम माना गया था, क्योंकि इससे कॉन्स्टेबल से सब-इंस्पेक्टर तक पदोन्नति के अवसरों में वृद्धि हुई। हालांकि इसी कैडर रिव्यू में निरीक्षक पद की भूमिका को कंपनी सेकेंड-इन-कमांड (2IC) से घटाकर केवल प्लाटून कमांडर स्तर तक सीमित कर दिया गया। इससे निरीक्षक रैंक की प्रशासनिक और नेतृत्वात्मक स्थिति कमजोर हुई और उनके कैरियर ग्रोथ पर प्रतिकूल असर पड़ा। वर्ष 2010 से 2025 तक प्रत्यक्ष नियुक्त राजपत्रित अधिकारियों की भर्ती लगातार जारी रही। दूसरी ओर, निरीक्षक जैसे लोकल प्रोमोटी अधिकारियों को उनके निर्धारित कोटे के अनुरूप पदोन्नति नहीं मिल सकी। इसका परिणाम यह हुआ कि कैडर संरचना में असंतुलन पैदा हो गया। निरीक्षकों का कहना है कि जब डायरेक्ट असिस्टेंट कमांडेंट की भर्ती नियमित रूप से की जा रही है, तो निरीक्षक से असिस्टेंट कमांडेंट का लोकल प्रमोशन क्यों रोका जा रहा है। स्थिति तब और गंभीर हो गई, जब प्रस्तावित नए ग्रुप ‘A’ कैडर रिव्यू में लगभग 1050 असिस्टेंट कमांडेंट (AC) पदों की संभावित समाप्ति की बात सामने आई। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो निरीक्षक से AC पदोन्नति की पहले से कमजोर श्रृंखला और अधिक बाधित हो जाएगी। इससे वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे अधिकारियों की उम्मीदों पर गहरा आघात पहुंचेगा। पदोन्नति में हो रही देरी का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2009 बैच के निरीक्षक आज भी असिस्टेंट कमांडेंट पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वहीं, 2006 बैच के कई अधिकारी ऐसे हैं, जिन्होंने लगभग 16 वर्षों की सेवा के बावजूद निरीक्षक पद से आगे बढ़ने का अवसर नहीं पाया। वर्तमान हालात में यह आशंका गहराती जा रही है कि कई अधिकारी उसी रैंक में सेवानिवृत्त होने को मजबूर हो सकते हैं।निरीक्षक संवर्ग में यह भी असंतोष है कि मौजूदा पदोन्नति ढांचा असमान है।जहां कुछ अधिकारियों को 20 वर्षों की सेवा में चार पदोन्नतियां मिल रही हैं, वहीं सब-इंस्पेक्टर के रूप में भर्ती हुए अधिकारियों को एक भी सुनिश्चित पदोन्नति नहीं मिल पा रही है। यह स्थिति न केवल न्यायसंगत सेवा नियमों के खिलाफ है, बल्कि बल के भीतर मनोबल को भी कमजोर कर रही है। निरीक्षक संवर्ग का कहना है कि ग्रुप ‘B’ और ग्रुप ‘A’ दोनों कैडर रिव्यू में उनकी भूमिका और भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई। आज भी यह स्पष्ट नहीं है कि निरीक्षक रैंक की दीर्घकालिक प्रशासनिक स्थिति क्या होगी और उनके लिए कैरियर ग्रोथ का मार्ग कैसा होगा। इस अस्पष्टता ने पूरे संवर्ग को अनिश्चितता में डाल दिया है। निरीक्षक संवर्ग ने माननीय गृह मंत्री और महानिदेशक, CRPF से न्यायोचित हस्तक्षेप की अपील की है। उनकी प्रमुख मांगों में निरीक्षक के लिए स्पष्ट एवं सुनिश्चित पदोन्नति नीति का निर्माण, निरीक्षक से असिस्टेंट कमांडेंट पदोन्नति के लंबित बैकलॉग का शीघ्र निस्तारण, कैडर रिव्यू में संतुलित दृष्टिकोण अपनाकर कम से कम चार सुनिश्चित पदोन्नति अवसर प्रदान करना, तथा DAGO और लोकल प्रोमोटी अधिकारियों के बीच संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना शामिल है। निरीक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से देश की आंतरिक सुरक्षा और काउंटर-इंसर्जेंसी अभियानों में अग्रिम पंक्ति में सेवा दे रहे हैं। उनके कैरियर विकास, सम्मान और मनोबल की रक्षा करना न केवल संगठन, बल्कि राष्ट्र के हित में भी आवश्यक है।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गृह मंत्रालय और सीआरपीएफ नेतृत्व इस गंभीर मुद्दे पर क्या ठोस और न्यायसंगत निर्णय लेते है।

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