ग्रेटर नोएडा में प्राधिकरण ने खुले में कचरा फेंकने की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए डोर-टू-डोर कचरा संग्रह और पृथक्करण (सेग्रिगेशन) योजना शुरू की

ब्यूरो चीफ/सत्य प्रकाश उपाध्याय
ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा में प्राधिकरण ने खुले में कचरा फेंकने की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए डोर-टू-डोर कचरा संग्रह और पृथक्करण (सेग्रिगेशन) योजना शुरू की है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, ग्रेटर नोएडा के आसपास के पेरि-अर्बन क्षेत्र, खासकर खाली प्लॉट और नाले, अक्सर अवैध कचरा डंपिंग के केंद्र बन जाते हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे लैंडफिल पर दबाव काफी बढ़ता है।
यह पहल गुरुवार से बदलपुर में लागू की गई है। इसके तहत अब घरों से सीधे कचरा उठाया जा रहा है। सूखा कचरा बस्ती के भीतर स्थापित मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) में भेजा जा रहा है, जहां उसका पृथक्करण और रीसाइक्लिंग की जाती है, जबकि गीले कचरे का अलग से निपटान किया जा रहा है। यह जानकारी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने दी।
अधिकारियों का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य खुले स्थानों में कचरा फेंके जाने और दूर-दराज के लैंडफिल तक कचरा ले जाने की मात्रा को कम करना है।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की अतिरिक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) श्रीलक्ष्मी वीएस ने कहा,
“विकेंद्रीकृत कचरा प्रसंस्करण से क्षेत्र के लैंडफिल पर दबाव कम होगा। यदि कचरे का सही तरीके से पृथक्करण और रीसाइक्लिंग लगातार जारी रहती है, तो इससे पेरि-अर्बन इलाकों में स्वच्छता और अधिक प्रभावी कचरा प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकता है।”
कचरा संग्रह के साथ-साथ, प्राधिकरण की टीमें घर-घर जाकर लोगों को गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण के लिए जागरूक कर रही हैं और मिश्रित कचरे व खुले में डंपिंग से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दे रही हैं।
ACEO ने आगे कहा,
“यह प्रयास न केवल बदलपुर में स्वच्छता और पर्यावरणीय हालात सुधारने के लिए जरूरी है, बल्कि आसपास के इलाकों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकता है। इससे ग्रेटर नोएडा को और साफ-सुथरा एवं सुंदर शहर बनाने में मदद मिलेगी।”
स्थानीय निवासियों का कहना है कि खुले में कचरा फेंकना लंबे समय से एक गंभीर समस्या बना हुआ था।
बदलपुर निवासी उमेश भाटी ने कहा,
“खुले स्थानों पर कचरे का ढेर लगना आम बात हो गई थी। हमें उम्मीद है कि यह व्यवस्था डंपिंग को कम करेगी और इलाके की सफाई में सुधार लाएगी।”
वहीं, स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ता और सोशल एक्शन फॉर फॉरेस्ट एंड एनवायरनमेंट (SAFE) के संस्थापक विक्रांत टोंगड ने कहा,
“केवल डोर-टू-डोर कचरा संग्रह से समस्या का समाधान नहीं होगा। घर स्तर पर कचरे का पृथक्करण ही तय करता है कि कचरा रीसाइक्लिंग तक पहुंचेगा या फिर डंप कर दिया जाएगा।”

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