रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

11 फरवरी: रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय। 🙏

पर हित सरिस धर्म नहिं भाई ।
पर पीड़ा सम नहिं अधमाई ।।
निर्नय सकल पुरान बेद कर ।
कहेउँ तात जानहिं कोबिद नर ।।( उत्तरकांड 40/1)
राम राम जी 🙏🙏
राज्याभिषेक उपरांत एकदिन जब सनकादि मुनि श्री राम जी से मिलकर चले जाते हैं तब भैया भरत जी ने श्री राम जी से संतों के लक्षण पूछते है। संतों के लक्षण बताने के बाद श्री राम जी कहते हैं कि हे भाई! दूसरों की भलाई के समान कोई धर्म नहीं है और दूसरों को दुख पहुँचाने के समान कोई पाप नहीं है ।सारे वेद पुराणों का यह सिद्धांत मैंने तुम्हें बताया है जिसे पंडितजन भी जानते हैं ।
बंधुवर ! दूसरों की भलाई करना सबसे बड़ा धर्म है, दूसरों की भलाई वही करता है जो श्री राम प्रेमी है क्योंकि श्री राम जी साक्षात धर्म हैं। अतः श्री राम जी के शरणागत होने पर ही जीव स्व हित छोड़कर पर हित की ओर चलता है।

10 फरवरी : रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

रामचरितमानस मुनि भावन ।
बिरचेउ संभु सुहावन पावन ।।
त्रिबिध दोष दुख दारिद दावन ।
कलि कुचालि कुलि कलुष नसावन ।।
( बालकांड 34/5)
जय सियाराम🙏🙏 गोस्वामी श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि श्री रामचरितमानस का आरंभ मैंने अयोध्या में किया जो सब सिद्धियों को देने वाली है। यह मुनियों का प्रिय है , इस सुहावने व पवित्र मानस की रचना भगवान शिव जी ने की है । यह तीनों प्रकार के दोषों, दुखों और दरिद्रता तथा कलियुग के कुचालों व सब पापों को नष्ट करने वाला है ।
बंधुओं ! भगवान शिव द्वारा रचित व पूज्यपाद गोस्वामी श्री तुलसीदास जी द्वारा लिखित यह श्री रामचरितमानस त्रिदोष नाशक है। यह हमारी दरिद्रता दूर करता है, कलियुग के कुचालों (दुष्टता) से हमारी रक्षा करता है और प्रभु श्री सीताराम जी की भक्ति प्रदान करता है। अथ…… श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *