प्रयागराज : जामताड़ा में बैठे साइबर अपराधियों के गिरोह के प्रतापगढ़ निवासी मददगार धीरज पांडेय से पूछताछ में कुछ अहम खुलासे हुए हैं। पता चला है कि उसने पिछले दो महीने में 100 से ज्यादा लोगों के मनी वालेट अकाउंट खोलवाए थे। जिनके जरिए लाखों रुपये का लेनदेन महज कुछ दिनों में हुआ। फिलहाल पुलिस धीरज व उसकेतीन अन्य साथियों को हिरासत में लेकर पूछताछ में जुटी है।
फतनपुर निवासी धीरज व उसकेसाथी रानीगंज निवासी रोहित पांडेय को पुलिस ने एक दिन पहले हिरासत में लिया था। आरोप है कि दोनों जामताड़ा से ऑपरेट करने वाले साइबर अपराधियों के गैंग के लिए काम करते थे। सूत्रों के मुताबिक, धीरज से पूछताछ में इस बात का खुलासा हुआ कि पिछले दो महीने के भीतर उसने डिजिटल पेमेंट एप के 100 से ज्यादा मनी वालेट अकाउंट खुलवाए थे। खास बात यह कि खाते खुलने के कुछ ही दिनों में इन खातों से लाखों रुपये का लेनदेन भी हुआ।
इस बारे में पूछने पर उसने बताया कि पहले वह अपने जानने वालों को सरकारी स्कीम का फायदा दिलाने का झांसा देकर उनके मनी वालेट अकाउंट खुलवाता था। इसके बाद इनकी यूजर आईडी व पासवर्ड जामताड़ा में बैठे अपने आकाओं को दे देता था। जामताड़ा गैंग फर्जीवाड़े के जरिए उड़ाई गई रकम इन्हीं मनी वालेट अकाउंट में ट्रांसफर करता था। बाद में यह रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर लिए जाते थे। सूत्रों का कहना है कि धीरज ने प्रतापगढ़ के साथ ही कई अन्य शहरों में रहने वाले लोगों के नाम पर भी इसी तरह खाते खुलवाए।
कमीशन का भी देता था लालच
पुलिस सूत्रों का कहना है कि धीरज झांसा देने के साथ ही लोगों को कमीशन का लालच देकर भी फंसाता था। उसने बताया कि वह जिस एप का मनी वालेट अकाउंट खोलवाता था, उसके लिए सिर्फ आधार व कुछ अन्य दस्तावेजों के साथ ही एक सक्रिय सिम नंबर की जरूरत होती है। ऐसे में वह लोगों को प्रति अकाउंट 1500 से 2000 का लालच देकर उनसे संबंधित दस्तावेज व सिम ले लेता था।
कंपनी ने करेली में दर्ज कराया केस
उधर जिस कंपनी के मनी वालेट अकाउंट के जरिए रकम का लेनदेन किया जाता था, उसके एक अधिकारी ने करेली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। कंपनी के प्रयागराज क्षेत्र के सीनियर रिलेशनशिप मैनेजर जयशंकर शुक्ला ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग कंपनी के बिजनेस पार्टनर, रिटेलर्स व डिस्ट्रीब्यूशर्स को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में ठगों ने डिस्ट्रीब्यूशर आईडी लेकर दो लाख का लेनदेन किया। जिसकेबाद करेली पुलिस ने मोबाइल नंबर के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कैसे हुआ संपर्क, पूछताछ केबाद ही होगा स्पष्ट
सूत्रों केअनुसार, अब तक कि पूछताछ में यह तो साफ है कि धीरज जामताड़ा में बैठे गिरोह के संपर्क में था। लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वह इनकेसंपर्क में कैसे आया। पूछताछ में उसने एक बार यह भी बताया कि मुंबई में रहने केदौरान उसकेनंबर पर फोन आया था। इसके बाद ही वह गिरोह के सदस्यों के कहने पर खाते खुलवाकर रकम का लेनदेन करने लगा। हालांकि बार-बार बयान बदलने के कारण फिलहाल उसका यह बयान संदेह के घेर में है। पुलिस का कहना है कि विस्तृत पूछताछ केबाद ही यह पता लगेगा कि वह जामताड़ा गिरोह के संपर्क में कैसे आया।
एक दिन पहले एक अन्य साथी पकड़ाया था
पुलिस ने दो दिन पहले फूलपुर से धीरज केएक साथी फतनपुर के ही भीट निवासी शुभम को पकड़ा था। मुंबई में रहने वाला शुभम कुछ दिन पहले अपनी दादी की तेरहवीं में शामिल होने आया था। इसी दौरान फूलपुर में रहने वाले रिश्तेदार के बुलाने पर वह उसके घर गया था जहां पुलिस ने उसे दबोच लिया। इस दौरान उसकेरिश्तेदार को भी हिरासत में ले लिया गया था।

