पीयू को ‘एक जिला–एक व्यंजन’ योजना में बड़ी जिम्मेदारी

पीयू को ‘एक जिला–एक व्यंजन’ योजना में बड़ी जिम्मेदारी
जौनपुर, आजमगढ़ और मऊ के पारंपरिक व्यंजनों को मिलेगा नया पहचान मंच

जौनपुर,23 फरवरी। यूपी में उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग द्वारा संचालित “एक जिला–एक व्यंजन” योजना को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय को “ज्ञान भागीदार” के रूप में महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है। इस पहल से जौनपुर, आजमगढ़ और मऊ जनपदों की पारंपरिक खानपान संस्कृति को नया मंच मिलने की उम्मीद है।
सोमवार को कुलपति प्रो. वंदना सिंह को योजना के अंतर्गत तैयार की गई प्राथमिक रिपोर्ट समन्वयक प्रो. प्रदीप कुमार और नोडल अधिकारी डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने प्रस्तुत की। रिपोर्ट में शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार तीनों जनपदों के दो-दो पारंपरिक व्यंजनों/खाद्य उत्पादों की पहचान कर उनका विस्तृत दस्तावेजीकरण किया गया है। इसे आगे की कार्रवाई हेतु शासन को भेजा जा रहा है।
इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक जिले की विशिष्ट खानपान परंपरा को चिन्हित कर उसे बाजार आधारित उत्पाद के रूप में विकसित करना है। इसके माध्यम से स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा तथा युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। विश्वविद्यालय को चयनित उत्पादों की गुणवत्ता मानक निर्धारण, पैकेजिंग सुधार, ब्रांडिंग, विपणन रणनीति और बाजार से जोड़ने की कार्ययोजना तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।
समन्वयक प्रो. प्रदीप कुमार ने बताया कि चयनित व्यंजनों को केवल पारंपरिक पहचान तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें उद्योग और पर्यटन से जोड़कर व्यापक पहचान दिलाई जाएगी। स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा, लेबलिंग, भंडारण क्षमता और मूल्य श्रृंखला विकास जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
नोडल अधिकारी डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा कि यह योजना क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों और लघु उद्यमियों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। कार्यक्रम में कुलसचिव केशलाल सहित कई वरिष्ठ शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

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