पठन संस्कृति उत्सव : स्क्रीन से पन्नों की ओर लौटने का सृजनात्मक संकल्प*

  • *पठन संस्कृति उत्सव : स्क्रीन से पन्नों की ओर लौटने का सृजनात्मक संकल्प*

 

लखनऊ:डिजिटल युग की तीव्रगामी जीवनशैली में जब पाठक और पुस्तक के मध्य की दूरी बढ़ती प्रतीत हो रही है, ऐसे समय में पठन संस्कृति को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में *”पठन संस्कृति उत्सव”* का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन माध्यमिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन एवं नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में 03 फरवरी 2026, प्रातः 10:00 बजे से, राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज, लखनऊ में संपन्न होगा।

 

यह उत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि *‘स्क्रीन से पन्नों की ओर’* लौटने का सांस्कृतिक आह्वान है, जो विद्यार्थियों, शिक्षकों, साहित्यकारों और समाज के प्रबुद्ध वर्ग को एक साझा वैचारिक मंच प्रदान करेगा।

 

कार्यक्रम के अंतर्गत पुस्तक प्रदर्शनी, ‘बूके नहीं, बुक’ अभियान, लेखक संवाद, तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं साहित्यिक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिनका उद्देश्य नई पीढ़ी में पठन-पाठन के प्रति रुचि, आलोचनात्मक सोच और सृजनात्मक चेतना को जाग्रत करना है।

 

यह आयोजन डॉ. सांत्वना तिवारी, विशेष कार्याधिकारी, पुस्तकालय प्रकोष्ठ, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। डॉ. सांत्वना तिवारी, जो राज्य में पुस्तकालय आंदोलन, पठन-पाठन की संस्कृति तथा शैक्षिक नवाचारों की सशक्त संवाहिका रही हैं, उनके निर्देशन में इस उत्सव को एक व्यापक शैक्षिक-सांस्कृतिक स्वरूप प्रदान किया गया है।

 

लखनऊ में आयोजित इस “पठन संस्कृति उत्सव” को सफलतापूर्वक संपन्न कराने हेतु संयुक्त शिक्षा निदेशक, लखनऊ मण्डल डॉ. प्रदीप कुमार सिंह एवं जिला विद्यालय निरीक्षक, लखनऊ श्री राकेश कुमार द्वारा सक्रिय सहभागिता एवं समन्वित प्रशासनिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। डॉ. प्रदीप कुमार सिंह एक अनुभवी शैक्षिक प्रशासक हैं, जिन्होंने लखनऊ मण्डल में शैक्षणिक गुणवत्ता, नवाचार आधारित शिक्षण तथा सह-शैक्षिक गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके समन्वय से यह आयोजन शैक्षिक जगत के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित होने की दिशा में अग्रसर है।

 

वहीं श्री राकेश कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक, लखनऊ, अपने कुशल प्रशासन, अनुशासित कार्यशैली और विद्यालयीय शिक्षा के सुदृढ़ीकरण हेतु निरंतर प्रयासों के लिए जाने जाते हैं।

 

संयुक्त शिक्षा निदेशक लखनऊ मण्डल कार्यालय के मण्डलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डॉ दिनेश कुमार ने बताया कि कार्यक्रम का प्रथम सत्र (10:00 से 11:40 बजे) उद्घाटन एवं लेखक संवाद को समर्पित होगा। इस सत्र में श्री पार्थ सारथी सेन शर्मा, अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश शासन, जो एक संवेदनशील प्रशासक, प्रखर विचारक और शिक्षा सुधारों के सशक्त सूत्रधार के रूप में प्रतिष्ठित हैं और जो समकालीन हिंदी लेखन में अपनी वैचारिक दृष्टि, शोधपरक लेखन और आलोचनात्मक विवेक के लिए जाने जाते हैं, पठन संस्कृति के महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।

 

उनके साथ सुप्रसिद्ध कवि, संगीत-समीक्षक एवं सांस्कृतिक चिंतक श्री यतीन्द्र मिश्र अपने साहित्यिक अनुभव साझा करेंगे। साथ ही श्री चंद्रशेखर वर्मा, चर्चित कथाकार एवं साहित्यिक संवादों के कुशल सूत्रधार, लेखक और पाठक के बीच जीवंत संवाद स्थापित करेंगे।

 

द्वितीय सत्र (11:40 से 12:05 बजे) में कला उत्सव के विजेता प्रतिभागियों की प्रस्तुतियां होंगी, जो विद्यार्थियों की रचनात्मक अभिव्यक्ति का सजीव प्रमाण होंगी। इस सत्र में किस्सागोई और कथावाचन की जीवंत परंपरा के संवाहक हैं और इस क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले श्री हिमांशु बाजपेई अपनी कथन-शैली और संवाद कौशल से श्रोताओं को साहित्य की मौखिक परंपरा से जोड़ेंगे।

 

तृतीय सत्र (12:05 बजे से कार्यक्रम समापन तक) में कहानी वाचन एवं अन्य साहित्यिक गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इस सत्र को वैचारिक गरिमा प्रदान करते हुए सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री चंद्रशेखर वर्मा की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रहेगी। वे हिंदी साहित्य के यशस्वी रचनाकार एवं पद्म भूषण से सम्मानित श्री भगवती चरण वर्मा के पौत्र हैं तथा साहित्यिक परंपरा की समृद्ध विरासत को आधुनिक संदर्भों से जोड़ने वाले एक प्रेरक वक्ता के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनकी साहित्यिक दृष्टि, विचारशील संवाद शैली और युवा पीढ़ी को पठन-पाठन की ओर प्रेरित करने की क्षमता इस सत्र को वैचारिक गहराई प्रदान करेगी। इस सत्र में युवा साहित्यिक प्रतिभा सुश्री वैष्णवी अपनी सृजनात्मक प्रस्तुति से श्रोताओं को साहित्यिक संवेदना से परिचित कराएंगी जो समकालीन संवेदनाओं और रचनात्मक अभिव्यक्ति का सजीव उदाहरण होगा।

 

*पठन संस्कृति उत्सव* केवल एक कार्यक्रम नहीं और न केवल पुस्तकों का उत्सव है, बल्कि विचार, विवेक और संवाद का उत्सव है। यह आयोजन नई पीढ़ी को यह संदेश देता है कि पुस्तकें केवल ज्ञान का भंडार नहीं, बल्कि संस्कार, संवेदना और लोकतांत्रिक चेतना की आधारशिला हैं।

 

इस साहित्यिक अनुष्ठान में सहभागिता हेतु सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों, साहित्य प्रेमियों एवं प्रबुद्ध नागरिकों को सादर आमंत्रित किया गया है।

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