मिलता है रोजगार

मिलता है रोजगार नामक कविता की लेखिका देश की बेटी का संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है

दीक्षा बोरा

उम्र – 17 वर्ष

कक्षा – 11वीं

रा. इ. का. मैगडी स्टेट

गरुड़, उत्तराखंड।।

पहाड़ों में होता है ये,

जंगलों के बीच पलता है,

लाया जाता पहाड़ियों से,

कई नई बातें इसमें ढलता है।

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होता है इसका बहुत सारा भार,

पर इससे मिलता है रोजगार,

जंगलों से इसे लाया जाता,

बाहर जाकर इसे बेचा जाता।
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समझा जाता है इसे

एक अच्छा साधन, एक पहचान,

इससे पहाड़ों में आता है

विकास का नया प्रमाण।

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महिलाओं को भी मिलता है

इससे रोजगार का सहारा,

हो जाती हैं वे आत्मनिर्भर,

बदल जाता है जीवन सारा।

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मिल जाए अगर ये रोजगार,

तो सपने होते हैं साकार,

होती है तब अपनी एक पहचान,

बढ़ता है आत्मविश्वास अपार।

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