कहाँ है शिक्ष? नामक कविता की लेखिका देश की बेटी का संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है
नाम – भावना
उम्र – 18
बागेश्वर, उत्तराखंड ;
कहते हैं देश बदल रहा है,
पर स्कूलों की हालत पूछो।
काग़ज़ों में हर रोज़ नया सपना,
हक़ीक़त में टूटते सपनों को देखो।
अरबों का बजट काग़ज़ों में आया,
पर क्लासरूम में कुर्सी तक नहीं।
दीवारों पर लिखा शिक्षा सबका अधिकार,
अंदर बच्चे बैठे किताब नहीं, शिक्षक नहीं ।।
मिड-डे मील में रोटी मिल जाती है,
पेट तो किसी तरह भर जाएगा।
पर ज्ञान का भोजन कब मिलेगा?
भविष्य कौन और कैसे बनाएं?
गाँव के मासूम नन्हें कदम,
किलोमीटरों चलकर स्कूल आते हैं।
फटी चप्पल, ऊबड़-खाबड़ रास्ते,
फिर भी सपनों के लिए रोज़ लड़ते जाते हैं।
कैसे बनेगा विश्व गुरु यह देश,
कैसे उड़ान भरेंगे बच्चों के सपने,
जब छोटी-छोटी सुविधाओं के बिना,
टूट जाता है हौसला उनका?

