8 फरवरी: रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
कोटि बिप्र बध लागहिं जाहू ।
आएँ सरन तजउँ नहिं ताहू ।।
सनमुख होइ जीव मोहि जबहीं ।
जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं ।। ( सुंदरकांड 43/1)
राम राम जी🙏🙏
विभीषण श्री राम जी की शरण में आए हैं , सुग्रीव सशंकित हैं, भेद लेने आया है ऐसा कहते हैं, तब प्रभु समझाते हुए कहते हैं कि करोड़ों ब्राह्मणों की हत्या का दोषी भी यदि मेरी शरण में आ जाता है तो भी मैं उसका त्याग नहीं करता हूँ। जीव ज्यों ही मेरे शरण में आता है, त्यों ही उसके करोड़ों जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं ।
बंधुवर ! पिछले जन्म के अपने पाप तो हमें आपको याद नही हैं, इस जन्म के तो याद है न, जबकि उनका प्रायश्चित तो हुआ नही, इसीलिए हमे अशांति है, अतः श्री सीताराम जी की शरणागति लें और जीवन पापमुक्त कर लें। अस्तु! श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

