जिला चिकित्सालय व महिला चिकित्सालय दलालों के शिकंजे में, शहर में अवैध अस्पतालों की भरमार

जिला चिकित्सालय व महिला चिकित्सालय दलालों के शिकंजे में, शहर में अवैध अस्पतालों की भरमार

सीएमओ देवेंद्र कुमार कब कसेगे शिकंजा

अयोध्या।जिला पुरुष चिकित्सालय व जिला महिला चिकित्सालय के साथ-साथ नगर के गली, कूचो, मुहल्लों, कालोनियोँं में संचालित अवैध से संचालित अस्पतालों निजी क्लीनिकों के ऊपर पुराने सीएमओ की तरह अभी कुछ दिन पहले आए नए सीएमओ डॉ देवेन्द्र कुमार का ध्यान नहीं जा रहा है।जबकि देखा जाए तो जिला पुरुष चिकित्सालय के साथ-साथ जिला महिला चिकित्सालय पर अपना इलाज करने आने वाले मरीजों के साथ अच्छी खासी धन उगाही वहां पर सक्रिय दलालों के अलावा कमीशन के नाम पर महंगे महंगी दवाइयां भी लिखने से वहां पर तैनात चिकित्सक दिखाई देते हैं।अभी कुछ दिन पहले जिला पुरुष चिकित्सालय में ब्लड बैंक के नाम पर अच्छी खासी वसूली के मामले भी आए हुए थे और जिस पर इससे संबंधित कर्मियों पर कार्यवाही भी हुई थी। इससे बुरा हाल जिला महिला चिकित्सालय का है देखा जाए तो वहां पर जिला अस्पताल के सामने संचालित निजी क्लीनिक तथा अस्पतालों पर कार्य महिला कर्मी अपना डेरा सुबह से लेकर देर रात तक जिला अस्पताल में डाले रहती हैं जिनका मुख्य उद्देश्य जिला महिला चिकित्सालय में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को किसी तरह बहला फुसलाकर निजी चिकित्सालय की ओर ले जाना होता है अभी कुछ माह पहले प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक जिला महिला चिकित्सालय ने सामने स्थित प्राइवेट क्लीनिक पर काम करने वाली महिला कर्मियों को सूचना पर पड़ा था। जिला पुरुष चिकित्सालय के साथ-साथ जिला महिला चिकित्सालय में इस तरह का तो खेल चलता ही है साथ ही साथ शहरके गलियों, मोहल्लौ कॉलोनियों में खुले अवैध रूप से संचालित क्लीनिक, अस्पतालों पर आखिर कब नये सीएमओ साहब डाक्टर संदीप कुमार कार्यवाही कब करेंगे? स्थानीय लोगों का कहना है कि सीएमओ साहब जिले के ग्रामीण अंचलों में सिर्फ छापा मार कर कार्यवाही करने में जुटे हुए हैं जबकि शहर के कई ऐसे मोहल्ले तथा गलियों हैं, जहाँ पर अवैध रुप संचालित अस्पताल व क्लीनिक तो है लेकिन वहां पर एंबुलेंस तो छोड़िए यहाँ पर कार तक नहीं जा सकती है। शहर के अति व्यस्ततम इलाका नाका के आसपास स्थित कई प्रतिष्ठित अस्पताल मुख्य मार्ग पर स्थित है।यहां पर इलाज करने आने वाले मरीज व उनके तीमारदार दो पहिया बाहन व चार पहिया वाहन मार्ग पर ही खड़ा कर देते है, जिसके चलते इस मार्ग पर सुबह से लेकर देर रात तक जाम लगा रहता है।वही शहर के हैदरगंज,वजीरगंज, कसाबबाड़ा जनौरा, रिकाबगंज, निगावां, मछली मंडी, सा हबगंज, बेनीगंज, कोरखाना, धनीराम का पुरवा सहित कई ऐसे मोहल्ले व कलोनिया है।जहाँ पर हस्पिटल, नर्सिंग होम व क्लीनिक संचालित है।इनके संचालक वहाँ पर आने वाले मरीजों से चिकित्सा के नाम पर पैसे भी वसूल रहे हैं लेकिन सुविधा देखी जाए तो कुछ नहीं है। कहीं-कहीं तो ऐसे नर्सिंग होम, हॉस्पिटल व क्लीनिक है।जहां पर एंबुलेंस तो छोड़िए कार तक के जाने का रास्ता नहीं है। सवाल यह उठता है कि अगर इन जगहों पर नर्सिंग होम क्लीनिक खुले हैं तो संबंधित विभाग द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र कैसे मिल गया।वहीं कुछ ऐसे नर्सिंग होम, हस्पिटल व क्लीनिक इन गलियों में खुले हुए हैं जिनके पास संबंधित विभाग द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र भी नहीं है।जिसपर सीएमओ डा० देवेन्द्र का नजर नहीं जा रहा है।

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