अ-मोक्ष -बोध
इं.श्री विश्वेश द्विवेदी ने अवगत कराया है कि, दिनांक 30-4-2023 को अपराह्न 4:00 बजे उनके आवास संख्या -415-8 -सी वृन्दावन योजना पर “अ- मोक्ष बोध” विषय पर एक परिचर्चा आयोजित की गयी ,जिसकी अध्यक्षता श्री आर पी द्विवेदी,ए.डी.जे.(से.नि.) ने किया तथा इसके संचालन का दायित्व श्रीयुत श्रीराम सहायक निदेशक बचत (से.नि.) ने संभाला। परिचर्चा में श्री एस के विश्नोई ,श्री असलम खान,श्री जटाशंकर,श्री के.एस.मिश्र,श्री वाई.पी.गौतम ,श्री समर्थ सिंह,श्री कुलदीप तिवारी ,श्री नागेन्द्र यादव,श्री ए.एन. वर्मा,,श्री अरुणेंद्र प्रताप सिंह,श्री विनय शंकर पाण्डेय, एवं श्री चंद्रजीत यादव आदि उपस्थित थे।
परिचर्चा में उपस्थित लोगों ने “अ-मोक्ष-चिन्तन” के विषय में “अ-मोक्ष एक प्रस्तुति” के लेखक श्री शिवशंकर द्विवेदी, संयुक्त सचिव से.नि. उत्तर प्रदेश शासन से विस्तार से जानकारी देने का अनुरोध किया। उल्लेखनीय है कि, “अ-मोक्ष एक प्रस्तुति” के लिए श्री शिवशंकर द्विवेदी को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान उत्तर प्रदेश के माध्यम से एक लाख रुपए के श्रीवालकृष भट्ट पुरस्कार से पुरस्कृत एवं सम्मानित किया गया है।
अ-मोक्ष-बोध के सम्बन्ध में श्री द्विवेदी जी ने विस्तार के समझाया कि,जीवन- प्रक्रिया की निरन्तरता में विश्वास ही “अ-मोक्ष बोध” है,। ऐसी कोई भी स्थिति नहीं आती है, जब कि, जीवनप्रक्रिया से मुक्ति मिलती हो। ऋग्वेद ही नहीं अपितु रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों में भी जीवन-प्रक्रिया की निरन्तरता को रेखांकित किया गया है। इन महाकाव्यों के नायकों ने जीवन-प्रक्रिया की निरन्तरता में विश्वास करते हुए ही जीवन के लिए अनुकरणीय आचरण प्रस्तुत किया है। श्री द्विवेदी ने अनेक उदाहरणों से समझाया कि, जीवनप्रक्रिया की निरन्तरता में विश्वास करते हुए नियतकर्म सम्पादन की ओर लोगों को उन्मुख करना ही श्रीमद्भगवद्गीता का विवेच्य विषय है। ऐसी स्थिति में जीवन प्रक्रिया में रहते हुए ही वह कार्य करना चाहिए,जिससे सामाजिक व्यवस्था बनी रहे। जिन कार्यों से लोगों को पीड़ा मिलती है, उन कार्यों से बचना चाहिए। वस्तुत: जीवन का उद्देश्य जीवनप्रक्रिया से बाहर होना नहीं अपितु जीवनप्रक्रिया में रहते हुए ही यशोमय ढङ्ग से अर्जित शुभ के माध्यम से आनन्दमय जीवनयापन करना ही है।
श्री द्विवेदी जी की जीवन के प्रति सकारात्मक सोच की प्रशंसा करते हुए उपस्थित लोगों ने शुभकामनाएं दी कि, ईश्वर उनकी लेखनी को ऊर्जावान बनाए रखें ताकि भविष्य में भी वह समाज के लिए उत्कृष्ट रचनाएं दे सकें।
अन्त में “अ-मोक्ष एक प्रस्तुति” के वितरक श्रीमती अलका द्विवेदी ने परिचर्चा में उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त करते हुए आशा व्यक्त किया कि,भविष्य में भी लोग ऐसी परिचर्चाओं में उपस्थित होकर परिचर्चा को गौरवान्वित करेंगे।
परिचर्चा में उपस्थित लोगों का आतिथ्य सत्कार श्रीमती कुसुम लता द्विवेदी और उनकी पौत्री अन्विका द्विवेदी ने किया।

