गीता प्रवचन स्वाध्याय का 82वाँ सप्ताह सफलतापूर्वक सम्पन्न : अमित परमार
देश की उपासना ब्यूरो
गीता प्रवचन स्वाध्याय का 82वाँ सप्ताह ऑनलाइन माध्यम से सम्पन्न हुआ। इस सत्र में “रजोगुण और उसका उपाय – स्वधर्म-मर्यादा” विषय पर गहन चिंतन किया गया। श्री अमित परमार द्वारा विषय का प्रवेश कराया गया, जिसमें रजोगुण की चंचलता, अस्थिरता और निरंतर क्रियाशील रहने की प्रवृत्ति पर प्रकाश डाला गया। आदरणीय ज्योत्सना दीदी, भारत महोदय तथा अन्य साथियों ने क्रमशः पैराग्राफ के आधार पर विषय का सार स्पष्ट किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्म विद्या मंदिर, पवनार से ज्योत्सना बहन द्वारा मंगलाचरण के साथ किया गया। उन्होंने कहा कि रजोगुण और तमोगुण मनुष्य को निरंतर अस्थिर बनाए रखते हैं। रजोगुण व्यक्ति को एक क्षण भी शांत नहीं रहने देता; वह नए-नए कार्यों, योजनाओं और उपलब्धियों की ओर दौड़ाता रहता है। किंतु यह दौड़ अंततः थकान, असंतोष और अधूरेपन का कारण बनती है।
भारत महोदय ने विस्तार से बताया कि रजोगुण का मुख्य लक्षण है—अनेक प्रकार के कार्यों में उलझे रहना, त्वरित फल की इच्छा रखना और स्थिरता का अभाव। रजोगुणी मनुष्य एक स्थान पर टिक नहीं पाता; उसका मन और कर्म निरंतर परिवर्तनशील रहते हैं। जैसे पर्वत से गिरता जल यदि अनेक दिशाओं में बिखर जाए तो उसकी शक्ति क्षीण हो जाती है, परंतु वही जल यदि एक दिशा में बहे तो नदी बनकर सामर्थ्य उत्पन्न करता है—उसी प्रकार मनुष्य की शक्ति भी एकाग्रता और मर्यादा से ही फलदायी बनती है।
विचार रखते हुए यह भी कहा गया कि रजोगुण का प्रभाव व्यक्ति को बाहरी उपलब्धियों, सम्मान और विविध कार्यों की ओर आकर्षित करता है, परंतु अंततः उससे संतोष नहीं मिलता। स्थिरता के अभाव में व्यक्ति का पुरुषार्थ बिखर जाता है। इसलिए गीता का कर्मयोग रजोगुण का उपचार बताता है—स्वधर्म का पालन, मर्यादित आचरण और फल की आसक्ति का त्याग। जब मनुष्य अपनी समस्त शक्ति को एक कर्तव्य में नियोजित करता है और उसे ईश्वरार्पण भाव से करता है, तभी चित्त-शुद्धि और वास्तविक प्रगति संभव होती है।
समापन वक्तव्य में आदरणीय सुरेश गर्ग ने कहा कि स्वधर्म का सतत चिंतन और उसी में शक्ति का समर्पण ही जीवन को सार्थक बनाता है। बिना उद्देश्य के अनेक कार्य करना कर्मयोग नहीं है; बल्कि सजगता, संयम और निष्ठा के साथ कर्तव्य का पालन करना ही सच्चा कर्मयोग है। कार्यक्रम के अंत में सभी सहभागियों ने संकल्प लिया कि वे रजोगुण की चंचलता से बचते हुए स्वधर्म-मर्यादा का पालन करेंगे और जीवन को अधिक अनुशासित एवं एकाग्र बनाएंगे।
अमित परमार ने कार्यक्रम में जुड़े आदरणीय ज्योत्सना पटेल, भारत महोदय, बिमल मुंडे जी, अनिल उपाध्याय जी, सीमा देशमुख, सत्रुधन झा, दीपिका उपाध्याय, दिलीप पवार, चतुरा रासकर, शिवम वाडा, डॉ. सुरेश गर्ग, हेमा ब्रह्मभट्ट, मनोज मीता पांडेय, क्रति शाह, उषा शर्मा, संदीप कुमार वर्मा, करूनेश राव, मनीषा, प्रोफेसर देवराज सिंह, बिमला दीदी, कुसुम जी, नाथूराम भाई, कविता जी, अलका प्रकाश पाण्डेय जी, शिवाकान्त जी, ओमप्रकाश जी, वर्षा शाह जी आदि सहभागियों को स्वाध्याय परिवार में नियमित जुड़ने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
साप्ताहिक स्वाध्याय प्रत्येक रविवार सायं 6:15 से 6:45 बजे ऑनलाइन आयोजित होता है। स्वाध्याय से जुड़ने के लिए आप मोबाइल नंबर 9670511153 अथवा ईमेल amitparmar47@gmail.com
के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं।

