डॉ. राम मनोहर लोहिया महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने किया अयोध्या धाम का ऐतिहासिक एवं ज्ञानवर्धक भ्रमण: ‘राम तत्व’ और आधुनिक विकास का किया प्रत्यक्ष अध्ययन
हरदोई: शिक्षा को केवल चार दीवारों तक सीमित न रखकर उसे समाज, संस्कृति, और इतिहास के वास्तविक धरातल से जोड़ने की अपनी उत्कृष्ट और निरंतर परंपरा का निर्वहन करते हुए, डॉ. राम मनोहर लोहिया महाविद्यालय, अल्लीपुर, हरदोई के छात्र-छात्राओं एवं प्राध्यापकों के एक दल ने पवित्र नगरी अयोध्या का एक अत्यंत सफल और ऐतिहासिक एक-दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण किया। यह यात्रा केवल एक सामान्य भ्रमण न होकर, भारतीय संस्कृति की जड़ों को गहराई से समझने, ऐतिहासिक वास्तुकला का अवलोकन करने और आधुनिक शहरी विकास के प्रतिमानों का अध्ययन करने का एक व्यापक शैक्षणिक अनुष्ठान था।
महाविद्यालय द्वारा पूर्व में ‘भारतीय साहित्य में राम तत्व’ जैसे गंभीर और महत्वपूर्ण विषयों पर राष्ट्रीय संगोष्ठियों के माध्यम से जो वैचारिक और साहित्यिक विमर्श प्रारंभ किए गए थे, यह अयोध्या यात्रा उसी अकादमिक श्रृंखला का एक व्यावहारिक और जीवंत विस्तार थी। छात्रों ने जिन आदर्शों और जीवन मूल्यों को पुस्तकों और संगोष्ठियों में पढ़ा और सुना था, उन्हें अयोध्या की पावन भूमि पर प्रत्यक्ष रूप से महसूस किया।
इस महात्वाकांक्षी और ज्ञानवर्धक यात्रा का अत्यंत कुशल, सुरक्षित और व्यवस्थित संचालन ट्रिप मैनेजर श्री श्यामजी गुप्ता के दिशा-निर्देशन में हुआ। एक बड़े छात्र समूह को इतने सुव्यवस्थित ढंग से ऐतिहासिक नगरी के विभिन्न स्थलों तक ले जाना और पूरी यात्रा की समय-सारणी का कड़ाई से पालन कराना श्री गुप्ता के उत्कृष्ट प्रबंधन कौशल का प्रमाण रहा।
प्राध्यापकों एवं कार्यालय कर्मचारियों का कुशल मार्गदर्शन इस संपूर्ण शैक्षणिक भ्रमण में विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करने, उन्हें ऐतिहासिक स्थलों के पुरातात्विक, साहित्यिक और समाजशास्त्रीय महत्व से अवगत कराने तथा उनका बौद्धिक मार्गदर्शन करने के लिए महाविद्यालय के विद्वान प्राध्यापकगण प्रमुखता से उपस्थित रहे। डॉ. शशिकांत पांडेय, डॉ. रश्मि द्विवेदी, श्री आनंद विशारद और डॉ. एस.एस. त्रिवेदी ने अपने गहन ज्ञान और अनुभव के माध्यम से छात्रों को प्रत्येक स्थल से जुड़ी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, रामायण कालीन संदर्भों और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उनकी प्रासंगिकता के बारे में विस्तार से समझाया।
किसी भी वृहद आयोजन या यात्रा की सफलता उसके पर्दे के पीछे काम करने वाले प्रबंधन तंत्र पर निर्भर करती है। इस यात्रा की संपूर्ण प्रशासनिक और लॉजिस्टिक व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने में महाविद्यालय के अत्यंत कर्मठ कार्यालय स्टाफ श्री संजय श्रीवास्तव, श्री अनूप सिंह और श्री अविनाश दीक्षित का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा। उन्होंने यात्रा से पूर्व की तैयारियों से लेकर यात्रा की समाप्ति तक परिवहन, खान-पान, और छात्रों की सुरक्षा से संबंधित हर छोटी-बड़ी व्यवस्था को मुस्तैदी से संभाला, जिससे प्राध्यापकगण और छात्र पूरी तरह से अपनी सीखने की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित कर सके।
ऐतिहासिक स्थलों का शैक्षणिक और सांस्कृतिक अध्ययन इस एक दिवसीय सघन भ्रमण के दौरान, महाविद्यालय के दल ने अयोध्या के उन सभी प्रमुख और ऐतिहासिक स्थलों का गहराई से अवलोकन किया, जो भारतीय आस्था, वास्तुकला और नव-निर्माण के अद्भुत प्रतीक हैं।
• भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर: यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और भावपूर्ण पड़ाव नव-निर्मित भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर रहा। यहाँ छात्रों ने न केवल अपनी असीम श्रद्धा अर्पित की, बल्कि मंदिर निर्माण में प्रयुक्त की जा रही नागर शैली की वास्तुकला, उन्नत इंजीनियरिंग, और बिना लोहे के उपयोग से बने पत्थरों के इंटरलॉकिंग सिस्टम का वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टि से भी अध्ययन किया। प्राध्यापकों ने छात्रों को इस स्थल के ऐतिहासिक संघर्ष और भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण में इसके समाजशास्त्रीय महत्व के बारे में विस्तार से बताया।
• हनुमान गढ़ी: दल ने अयोध्या के रक्षक माने जाने वाले भगवान हनुमान को समर्पित ऐतिहासिक हनुमान गढ़ी के दर्शन किए। 76 सीढ़ियों की ऊंचाई पर स्थित और एक किले (Fort) के आकार में निर्मित इस मंदिर ने छात्रों को मध्यकालीन सुरक्षा वास्तुकला और भौगोलिक ऊंचाइयों के सामरिक उपयोग का प्रत्यक्ष ज्ञान कराया। छात्रों ने यहाँ निष्ठा, सेवा और समर्पण के आदर्शों को समझा।
• दशरथ महल: चक्रवर्ती सम्राट दशरथ के इस प्राचीन राजमहल के अवलोकन से विद्यार्थियों को त्रेतायुग की राजसी परंपराओं, पारिवारिक मूल्यों और उस कालखंड की सामाजिक संरचना की एक कल्पनात्मक समझ प्राप्त हुई। यह स्थान रामायण के पारिवारिक संबंधों और राजधर्म के अध्ययन के लिए एक सजीव प्रेरणा स्रोत बना।
• सरयू तट और राम की पैड़ी: पवित्र सरयू नदी के तट पर पहुँचकर छात्रों ने प्रकृति और संस्कृति के अनूठे संगम का अनुभव किया। राम की पैड़ी का भ्रमण विशेष रूप से ज्ञानवर्धक रहा। यह स्थान विश्व प्रसिद्ध ‘दीपोत्सव’ का मुख्य केंद्र है। छात्रों ने यहाँ अर्बन प्लानिंग (शहरी नियोजन), रिवरफ्रंट के विकास और जल प्रबंधन की आधुनिक हाइड्रोलिक तकनीकों का अवलोकन किया। समाजशास्त्र और पर्यावरण के दृष्टिकोण से, यह स्थान बड़े पैमाने पर जन-भागीदारी (Mass Participation) और नदी पारिस्थितिकी तंत्र (River Ecosystem) के संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है।
• लता मंगेशकर चौक: यह चौक कला, संगीत और आधुनिक भारत के सम्मान का प्रतीक है। विशालकाय वीणा की स्थापना और वाद्ययंत्रों से जुड़े इस चौक को देखकर छात्रों ने समझा कि कैसे एक शहर अपने धार्मिक स्वरूप के साथ-साथ अपनी कलात्मक और सांगीतिक धरोहर को भी आधुनिक वास्तुकला के माध्यम से सहेज और संवार सकता है।
• राम पथ: यात्रा के दौरान अयोध्या के नव-निर्मित ‘राम पथ’ से गुजरते हुए छात्रों ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स, चौड़ी सड़कों के निर्माण, भूमिगत केबलिंग और एक प्राचीन शहर को विश्व स्तरीय पर्यटन और स्मार्ट शहर में बदलने की इंफ्रास्ट्रक्चरल बारीकियों का अनुभव किया।
राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्वयंसेवकों की उत्कृष्ट भूमिका इस संपूर्ण यात्रा की एक सबसे बड़ी विशेषता राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के छात्र स्वयंसेवकों का अद्वितीय योगदान रही। इतने बड़े दल के साथ भीड़-भाड़ वाले शहर में भ्रमण करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन एनएसएस के ऊर्जावान और अनुशासित स्वयंसेवकों ने इसे अत्यंत सहज बना दिया।
स्वयंसेवक दल के सदस्य वैष्णवी पटवा, मुकेश कुमार, पूजा, प्रीति, आशीष, राहुल, रोहित, निकिता, विवेक और शुभम ने पूरे समय एक मानव श्रृंखला के रूप में काम किया। उन्होंने न केवल अपने सहपाठियों को एक साथ रखा, बल्कि यातायात नियमों का पालन कराने, ऐतिहासिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने (स्वच्छ भारत अभियान के तहत), और वरिष्ठ शिक्षकों व कर्मचारियों के हर निर्देश का तत्परता से पालन करने में अद्वितीय नेतृत्व क्षमता (Leadership Skills) का प्रदर्शन किया। उनकी सक्रियता, सेवा भाव और अनुशासन ने महाविद्यालय के मूल्यों को अयोध्या की सड़कों पर भी गौरवान्वित किया।
शैक्षणिक निष्कर्ष एवं भविष्य की दिशा डॉ. राम मनोहर लोहिया महाविद्यालय का यह मानना है कि शिक्षा केवल कक्षाओं में व्याख्यान देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इस अयोध्या भ्रमण ने छात्रों के मस्तिष्क पर जो गहरी छाप छोड़ी है, वह आजीवन उनके साथ रहेगी। इस यात्रा से छात्रों ने न केवल इतिहास, वास्तुकला, और धर्म का अध्ययन किया, बल्कि यात्रा के दौरान आपसी सहयोग, समय प्रबंधन, और सामूहिक जिम्मेदारी जैसे जीवन के महत्वपूर्ण कौशल (Life Skills) भी सीखे।
वापसी के समय छात्रों के चेहरों पर एक नई ऊर्जा, गौरव और ज्ञान की चमक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी। महाविद्यालय प्रबंधन ने भविष्य में भी इस प्रकार के राष्ट्रीय और सांस्कृतिक महत्व के स्थानों के शैक्षणिक भ्रमण आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई है, ताकि विद्यार्थी अपनी जड़ों से जुड़े रहें और एक सशक्त, ज्ञानवान और सुसंस्कृत भारत के निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकें।
यह ऐतिहासिक यात्रा ज्ञान, अनुशासन, प्रबंधन और सांस्कृतिक चेतना का एक ऐसा संगम साबित हुई है, जिसे डॉ. राम मनोहर लोहिया महाविद्यालय, अल्लीपुर के स्वर्णिम पन्नों में हमेशा याद रखा जाएगा।

