परीक्षा के पहले दिन दोनों पालियों में करीब 36000 परीक्षार्थियों ने दी परीक्षा

एकेटीयू की सम सेमेस्टर परीक्षा शुरू

ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय

लखनऊ। डॉ0 एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के सत्र 2022-23 की सम सेमेस्टर स्नातक एवं परास्नातक के रेगुलर एवं कैरीओवर के प्रथम चरण की परीक्षा सोमवार को पूरे प्रदेश में आयोजित हुई। दो पालियों में हुई परीक्षा के दौरान कुल करीब 36000 परीक्षार्थी शामिल हुए। जबकि 42 परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी। कुलपति प्रो0 जेपी पांडेय ने परीक्षा केंद्रों की जानकारी लेकर चुस्त-दुरूस्त व्यवस्था बनाये रखने का निर्देश दिया। वहीं, परीक्षा केंद्रों की निगरानी सीसीटीवी के जरिये विश्वविद्यालय से हुई।

सीसीटीवी से निगरानी
परीक्षा की शुचिता बनाये रखने के लिए सेंटर पर कैमरे से निगरानी की गयी. कंट्रोल रूम से सभी परीक्षा केंद्र देखे गये. वहीं जिन सेंटर पर कैमरे नहीं थे वहां एनीडेस्क सॉफ्टवेयर की मदद से कंप्यूटर के जरिए निगरानी रखी गयी.

परीक्षा में बैठेंगे एक लाख से ज्यादा परीक्षार्थी

परीक्षा के लिए पूरे प्रदेश में 128 केंद्र बनाए गए हैं। हर केंद्र पर दो पर्यवेक्षक तैनात हैं। इस बार परीक्षा में 110000 से ज्यादा परीक्षार्थी शामिल हो रहीे हैं। वही लखनऊ जिले में 16 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।
परीक्षा की शुचिता बनाये रखने के लिए परीक्षार्थियों की फेस बायोमेट्रिक उपस्थिति केंद्रों पर हुई। साथ ही गेट पर हर परीक्षार्थी की जांच के बाद ही अंदर प्रवेश दिया गया। वहीं, केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं जिन पर परीक्षा के दौरान विश्वविद्यालय से निगरानी की जा रही है। पहले दिन परीक्षा के दौरान कुल 36141 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। जिसमें से 142 परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी। सुबह की पाली में जहां 141 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे तो वहीं शाम की पाली में 1 ने परीक्षा से किनारा कर लिया। जबकि पहली पाली में 36000 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी तो दूसरी पाली में 11 परीक्षा में शामिल हुए। वही 9 परीक्षार्थी नकल करते हुए पकड़े गए।हर केंद्र पर दो ऑब्जर्वर भी तैनात हैं।

पर्यावरण को बचाएंगे ग्रीन स्टार्टअप

एकेटीयू में विश्व पर्यावरण दिवस पर कार्यक्रम का हुआ आयोजन, स्टार्टअप ने अपनी प्रस्तुति दी

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर सोमवार को डॉ0 एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के इन्नोवेशन हब की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान पर्यावरण को बचाने पर मंथन किया गया। साथ ही पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में मदद करने वाले 10 ग्रीन स्टार्टअप ने अपने प्रोडक्ट की प्रस्तुति दी। कुलपति प्रोफेसर जे.पी.पाण्डे के दूरदर्शी मार्गदर्शन में ग्रीन स्टार्टअप्स को पर्यावरण की सुरक्षा के लिए काम करने की एक नई पहल कर रहे हैं। स्टार्टअप ‘प्लास्टिक प्रदूषण’ से संबंधित समाधानों पर केंद्रित है।

इस मौके पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. सरवन बघेल ने कहा कि सरकार द्वारा पर्यावरण में फेंके जा रहे खतरनाक कचरे के प्रभावों के बारे में जनता को जागरूक करने के लिए बहुत कुछ किया जा रहा है. सार्वजनिक रूप से पर्यावरण के प्रति जागरूक निर्णय लेने और हरित भविष्य के लिए परिवर्तन में योगदान करने के लिए यह स्थिरता स्टार्टअप की एक अतिरिक्त जिम्मेदारी है। ‘ग्रीन स्टार्टअप्स’ द्वारा कई अभिनव समाधान पहले से ही विकसित किए जा रहे हैं जैसे शैवाल से बने बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक; कार्बन पदचिह्न को मापना, रिपोर्ट करना और कम करना; वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत; जल निकायों और जैव विविधता का संरक्षण, पुन: प्रयोज्य पानी की बोतलें और बहुत कुछ। एक स्थायी स्टार्टअप मॉडल स्थापित करना कोई आसान प्रक्रिया नहीं है। इसमें समय और धैर्य लगता है, ठीक वैसे ही जैसे प्रकृति माँ करती है। डॉ. बघेल ने मजबूत स्टार्टअप समाधानों के साथ पर्यावरण की रक्षा के लिए एक बहुत ही सक्रिय चुनौती लेने के लिए एक शानदार प्रयास करने के लिए इनोवेशन हब टीम को बधाई दी। विशिष्ट अतिथि विशेष सचिव, योजना विभाग अर्बन प्लानिंग डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने कहा कि हर साल 400 मिलियन टन से अधिक प्लास्टिक का उत्पादन होता है, जिसमें से आधे को केवल एक बार उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें से 10 फीसदी से भी कम को रिसाइकिल किया जाता है। आज, प्लास्टिक हमारे लैंडफिल को बंद कर देता है, समुद्र में चला जाता है और जहरीले धुएं में जल जाता है, जिससे यह ग्रह के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बन गया है। वही माइक्रोप्लास्टिक तो हमारे भोजन में हवा में जल में भी मिल गया है जो सीधे हमारे शरीर में जा रहा है। हैं।

प्रबंध निदेशक, यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कार्पोरेशनअक्षय त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा किए गए आविष्कार तकनीकी प्रगति और व्यवसाय के प्रति पर्यावरण के अनुकूल दृष्टिकोण को बनाए रखने से उत्पन्न आशावादी प्रभाव का प्रमाण हैं। वैश्विक जलवायु, सरकारी समर्थन और निजी निवेश ने भारत के लिए उपयुक्त समाधानों का परीक्षण और डिजाइन करने के लिए स्टार्टअप्स के लिए एक लाभकारी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है। जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट (जेडईडी) जैसी विभिन्न सरकारी पहलें स्थिरता चालकों के एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रही हैं। अध्यक्षता करते हुए प्रति कुलपति प्रोफेसर मनीष गौड़ ने कहा कि वर्तमान में प्लास्टिक हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसे खत्म करने के लिए निश्चित रूप से हम सबको मिलकर पहल करनी होगी। ग्रीन स्टार्टअप इस दिशा में बेहतर करके समाज को पर्यावरण से सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं। विषय स्थापना डॉ. अनुज कुमार शर्मा, एसोसिएट डीन, इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन ने की जबकि इनोवेशन हब के प्रमुख महीप सिंह ने धन्यवाद दिया। कार्यक्रम का संचालन वंदना शर्मा, जबकि रितेश सक्सेना नीति निर्माताओं और गणमान्य व्यक्तियों के साथ स्टार्टअप गोलमेज कराया। इस मौके पर काफी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

वित्त समिति में लिये गये महत्वपूर्ण फैसले

डॉ0 एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय में सोमवार को वित्त समिति की बैठक कुलपति प्रो0 जेपी पांडेय की अध्यक्षता में हुई। बैठक में विभिन्न प्रस्तावें पर चर्चा की गयी। कई प्रस्तावों पर समिति ने अपनी मंजूरी दी।

विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फॉर्मेसी और स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के वित्तीय वर्ष 2022-23 में संचालित सेल्फ फाइनेंस कोर्स के बजट के प्रस्ताव पर अनुमोदन प्रदान किया गया। बैठक में प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा कल्पना अवस्थी, वित्त अधिकारी श्री जीपी सिंह, आईईटी के निदेशक प्रो0 विनीत कंसल, वास्तुकला संकाय की प्राचार्या प्रो0 वंदना सहगल, कैश के निदेशक प्रोफेसर वीरेंद्र पाठक, यूपीआईडी नोएडा के निदेशक डॉ प्रवीण पचौरी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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