पीआईसीयू सेंटर से शाम होते ही गायब हो जाते हैं चिकित्सक, शासन का आदेश बेअसर
गोरखपुर ब्यूरो चीफ
गोरखपुर:
गंभीर बीमार मासूमों सहित परिजनों को अब रेफर का दर्द न झेलना पड़े और समुचित इलाज हो सके इसके लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों बाल चिकित्सा गहन देखभाल इकाई का निर्माण सरकार द्वारा पानी की तरह पैसा बहाकर किया गया है।लेकिन पीकू सेंटरों पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही के चलते सरकार की यह योजना अब सिर्फ हाथी के दाँत साबित हो रहे हैं।
गोरखपुर के दक्षिणांचल में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अरांव जगदीश के पीआईसीयू पर कई चिकित्सक तैनात हैं लेकिन ये सभी चिकित्सक रात्रि निवास नहीं करते और शाम होते ही सेंटर छोड़ भाग जाते हैं। जिसके कारण यहां आए मरीजों का इलाज नहीं हो पाता जिससे सरकार की मंशा पर पानी फिर रहा है।और मरीजो को जिला अस्पताल जाना पड़ रहा है। बता दें पीआईसीयू इकाई में वेंटीलेटर सहित अन्य अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण स्थापित किया गया है। एचडीयू (हाई डिपेंडेंसी यूनिट) भी तैयार कर है।
संचालनालय स्वास्थ्य सेवा द्वारा दो वेंटीलेटर प्रबंधन को उपलब्ध भी करा दिए गए हैं। दोनों वेंटीलेटर पीआईसीयू में स्थापित है। 1 माह से 15 वर्ष तक के गंभीर बीमार बच्चों को अभी इमरजेंसी ट्रायेज असेस्मेंट एवं टीट्रमेंट इकाई में प्राथमिक उपचार प्रदान किया जाता है।
स्वास्थ्य में सुधार होने पर शिशु रोग वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता है। सुधार नहीं होने पर जिला अस्पताल गोरखपुर व मेडिकल कॉलेज गोरखपुर भेजने का प्रावधान है। इसके साथ ही शासन का आदेश है कि पीआईसीयू के चिकित्सक 24 घण्टे ड्यूटी पर तैनात रहेंगे।लेकिन यह आदेश सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अरांव जगदीश के पीआईसीयू के चिकित्सकों पर बेअसर है।
इस संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अरांव जगदीश के अधीक्षक डॉ गौरव कुमार सिंह से उनका पक्ष जानने का काफी प्रयास किया गया लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।

