यूजीसी की गाइडलाइन है या तलवानी फतवा , राना ठाकुर

यूजीसी की गाइडलाइन है या तलवानी फतवा , राना ठाकुर
आखिर कैसे पता चलेगा कि कोई कथित उच्च वर्ग का विद्यार्थी अपने सहपाठी कथित निम्न वर्ग पर हीनभावना से दृष्टि डाल रहा है
यदि पीड़ित ने शिकायत की है तो सही मानी जाएगी साथ ही अगर झूठी निकली तो उस पर कोई कार्यवाही भी नहीं होगी
मुझे याद है कि एक बार ऐसे ही तालिबानी फरमान में कहा गया था कि किसी कथित दलित लड़की का बुरी नियत से पीछा करते देखा गया तो कड़ी कार्यवाही होगी
आखिर ऐसा कौन सी सूक्ष्मदर्शी सरकार को मिल गई है जिससे तुरंत पीड़ित की जाति पता चल जाती है
चाहे कथित पीड़ित कार में हो और आरोपी साइकल पर , जाहिर है आरक्षण के बावजूद भी जब इनके मनसूबे पूरे नहीं हो पा रहे तो इन्होंने नए हथकंडे अपनाना शुरू कर दिया है
अभी माइनस 40 अंकों वाले को पीजी में डॉक्टर बनाने की खबर पुरानी भी नहीं हुई कि यूजीसी गाइडलाइन का कहर जैसे खबर सामने आई है
असल में इसके पीछे सवर्णों की कायरता भी समाने आ रही है चूंकि इतना सब कुछ होने के बावजूद यह समाज विरोध नहीं कर पा रहा है चूंकि ज्यादातर सवर्ण सत्ता की गुलामी में कार्यरत है
जिसे अपनी ही भावी पीढ़ी की बरबादी नहीं दिख रही है
अरे इतना ज्ञान तो पशुओं को भी होता है कि अपनी बच्चों की रक्षा कैसे की जाती है
खैर जो भी हो सवर्णों केे विनाश में कोई कसर न छोड़ने वाली पार्टियां लगातार मनमानी कर रही है
मुझे याद है मोदी जी का वह भाषण जिसमे उन्होंने कहा था जिस पर इतना अत्याचार हुए हों वह मौका पाकर बदला लेगा या नहीं
बोलो लेगा या नहीं
शायद आज वही बदला लिया जा रहा है
यू एस राना ठाकुर दिल्ली

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