21 जनवरी: रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
भेद हमार लेन सठ आवा ।
राखिअ बाँधि मोहि अस भावा।
सखा नीति तुम्ह नीकि बिचारी
मम पन सरनागत भयहारी ।।
( सुंदरकांड 42/4)
राम राम जी🙏
विभीषण श्री राम जी की शरण में आए हैं , सुग्रीव आकर श्री राम जी को बताते हैं, श्री राम जी पूछते हैं कि मित्र! क्या कहते हो ? सुग्रीव कहते हैं कि यह सठ हमारा भेद लेने आया है , मेरा कहना है कि इसे बाँध कर रखा जाए। श्री राम जी कहते हैं कि मित्र कहते तो तुम ठीक हो परंतु मेरा प्रण तो शरणागत को भय मुक्त करना है ।
बंधुवर ! जगत की शरण लेंगे तो वह बांधने का काम करेगा और जगदीश की शरण लेंगे तो भयमुक्त होकर निर्भय हो जाएँगे । अतः भयमुक्त होने के लिए श्री सीताराम जी की शरण लें और सतत श्री सीताराम नाम भजन का आश्रय ले । अथ…. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

