रामनगरी में हो रहे राम-मंदिर के निर्माण से यहां का पर्यटन बढ़ेगा, और इससे निश्चित रूप से हर घर में खुशहाली आएगी

अयोध्या।(सरवन कुमार नगर संवाददाता)अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 से 6 दिसंबर 2021 अब वर्ष गिनने की जरूरत नहीं है।अब अयोध्या को निरंतर विकास की आवश्यकता है।न काला दिवस की जरूरत है और ना ही किसी तरीके की शौर्य दिवस की जरूरत है। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो रहा है उससे अयोध्या का पर्यटन विकास होगा तो हर घर खुशहाली आएगी। यह बात बाबरी मस्जिद के पक्ष कार मरहूम हाशिम अंसारी के बेटे बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी का कहना है। इकबाल अंसारी अपने मरहूम पिता हाशिम अंसारी के साथ बाबरी मस्जिद मुकदमे की पैरवी करते रहे हैं। एक ही रिक्शे से जाते थे पैरवी करने, इकबाल अंसारी का कहना है कि हमने वह दौर भी देखा है जब राम जन्मभूमि न्यास के पहले अध्यक्ष दिवंगत संत रामचंद्र दास परमहंस मुकदमे की पैरवी करने के लिए हाशिम अंसारी के साथ एक ही रिक्शे से कचहरी जाया करते थे। आज भी इकबाल अंसारी का अयोध्या के साधु संतों के साथ बहुत अच्छा संबंध है।इकबाल अंसारी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब किसी भी तरीके के योमे गम जैसे कोई कार्यक्रम वह नही आयोजित करते हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सभी को सर्वमान्य हैं और वह चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी राम मंदिर का निर्माण हो और श्री राम अपनी मूल गर्भ गृह में विराजमान हों। इकबाल अंसारी देश और दुनिया को कहना चाहते हैं क्यों सभी लोग एक दूसरे के धर्म का सम्मान करें और भारत देश की प्रगति के सहयोगी बने। नही है भाषण की जरूरत, विश्व हिंदू परिषद के मीडिया प्रवक्ता शरद शर्मा का कहना है अब किसी भी तरीके के कार्यक्रम की जरूरत नहीं है, और न ही भाषण देने की जरूरत है। राम मंदिर निर्माण कार्य तेजी के साथ चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सभी ने सम्मान किया है। किसी तरीके के शौर्य दिवस और भाषण बाजी अब वक्त नहीं हैं। बहुत हो तो लोग अपने घरों और मंदिरों के बाहर दीपक जलाएं लेकिन किसी तरीके की भाषण बाजी मत करें। रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का कहना है की अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नाही शौर्य दिवस की जरूरत है और ना ही योमें गम को मनाना चाहिए।अब सिर्फ सद्भावना की बात होनी चाहिए।

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