राम नगरी अयोध्या के युवा दुनिया में परचम लहराने को है बेताब 

अयोध्या।(राजेश श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ अयोध्या)

इस समय रामनगरी अयोध्या के युवा दुनिया में छा जाने को बेताब हैं।वे चाहे वो खेल की दुनिया हो, कला की हो या फिर साहित्य की दुनिया से हो।युवा कामयाबी के झंडे बुलंद कर रहे हैं। ये युवा स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श मानते हैं। उनके ध्येय वाक्य-‘उठो जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक रुको मत’ का अनुसरण करते हैं।सूत्र के मुताबिक इनके सामने परेशानियां आईं।सूत्र के मुताबिक इन होनहारो को अनेक बार ठोकरें लगीं लेकिन इन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक-एक कदम आगे बढ़ाते रहे और सफलता की नई इबारत लिख दी। युवा कहते हैं कि-माना अगम अगाध सिंधु हैं, संघर्षोँ का पार नहीं है, मगर डूबना मझधारों में साहस को स्वीकार नहीं है…। इसी दृढ़ संकल्प के साथ शहर के युवा नई मिसाल बनाने को उत्सुक हैं। राष्ट्रीय युवा दिवस पर उनका संकल्प है कि कुछ और नई मंजिलें तय करनी हैं, कुछ और नए रास्ते तलाशने हैं। युवाओं ने ‘अमर उजाला’ से अपने संकल्प साझा किए।सूत्र के मुताबिक 13 वर्षीय मृगेंद्र राज की उपलब्धि लोगों को अचंभित कर देती है। साहित्य जगत का यह नन्हा सितारा देश-दुनिया में छा जाने को बेताब हैं। मृगेंद्र ने महज छह वर्ष की उम्र से ही अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन शुरू कर दिया था। आज मृगेंद्र के नाम सात विश्व रिकॉर्ड हैं। उन्होंने अब तक करीब 150 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं।उन्होने 100 से अधिक विशिष्ट लोगों की बायोग्राफी भी लिखी हैं।रामायण के पात्रों पर 51 पुस्तकें लिखने का भी रिकॉर्ड उनके नाम हैं।मृगेंद्र के पिता राजेश पांडेय गन्ना विभाग में कार्यरत हैं।माता डॉ. शक्ति पांडेय सुल्तानपुर के गनपत सहाय महाविद्यालय में शिक्षिका हैं।अयोध्या निवासी करन-अर्जुन संगीत के क्षेत्र में अयोध्या का नाम रोशन कर रहे हैं।दोनों भाई प्रियाप्रीतम केलिकुंज में महंत गोविंद शरण के संरक्षण में अपनी योग्यता को निखार रहे हैं। करन-अर्जुन संगीत के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों में अपना स्वर संगीत का जादू दिखाते रहे हैं। वर्ष 2021 में अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन में इन्हें पुरस्कृत भी किया जा चुका है। बस्ती महोत्सव में पद्मश्री योगेंद्र द्वारा सम्मानित किए जा चुके हैं।
करन-अर्जुन कहते हैं कि वे स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात करते हैं। कहा कि लक्ष्य कोई भी हो, यदि विवेकानंद के विचारों को अपनाकर कार्य किया जाए तो हर मंजिल पाई जा सकती है।इसी कड़ी में रामनगरी के लक्ष्मणघाट निवासी रितेश मिश्रा का नाम अयोध्या के हर आदमी के जुबां पर होता है।वे गोसवा की मिसाल बन चुके हैं।रितेश के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है, बावजूद इसके वे गोसेवा को अपना ध्येय बना चुके हैं। पूरे जिले में गोसेवा के लिए उनका नाम प्रसिद्ध हैं। कोरोना काल में जब अपनों ने ही अपनों से दूरी बना ली थी, ऐसे समय में रितेश आगे बढ़कर आए थे। उन्होंने कई कोरोना संक्रमित मरीजों का अंतिम संस्कार भी कराया।बेजुबानों की सेवा के लिए एक फोन आते ही वह दौड़ पड़ते हैं।उनकी सेवाओं के लिए डिप्टी सीएम डॉ.दिनेश शर्मा उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।वे कहते हैं बेजुबानों की सेवा ही उनका ध्येय है।विकास खंड मिल्कीपुर के ग्राम पंचायत खिहरन निवासी मुक्केबाज प्रियांशु श्रीवास्तव का भी सपना बड़ा है।वे बॉक्सिंग के क्षेत्र में बड़ा नाम कमाना चाहते हैं।जबकि इसी जिले के निवासी प्रियांशु श्रीवास्तव ने वर्ष 2021 के यूथगेम नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर सभी का ध्यान आकर्षित किया था। वो बीएसएफ में भर्ती के लिए भी प्रयासरत हैं, इसके पीछे उनकी मंशा देश सेवा करने की है। प्रियांशु कहते हैं कि वे स्वामी विवेकानंद जी के ध्येय वाक्य-उठो जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक रुको मत…का अनुसरण करते हैं। बोले कि उनका सपना न सिर्फ अच्छा खिलाड़ी बनने का है बल्कि सेना में जाकर देश के लिए कुछ कर गुजरने का भी है।

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