श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

10 जुलाई- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

सुनु सुत भयउ कालबस रावन ।
सो कि मान अब परम सिखावन ।
धन्य धन्य तैं धन्य बिभीषण ।
भयहु तात निसिचर कुल भूषन ।
( लंकाकांड 63/4)
राम राम 🙏🙏
रावण की आधी सेना मारी जा चुकी है , रावण अब कुंभकर्ण को जगाता तथा सब बताता है । पहले कुंभकर्ण रावण को समझाता है फिर युद्ध के लिए चल पड़ता है । उसे देखकर बिभीषण आकर उससे मिलते हैं तथा रावण के पद प्रहार तथा राम शरण में आने की बात बताते हैं । कुंभकर्ण कहता है कि विभीषण! रावण काल के वश में हो गया है इसीलिए वह नहीं मान रहा है । विभीषण आप धन्य है जो राक्षसकुल के भूषण हो गये हो ।
जो राम की नहीं सुनता व मानता है वही काल के वश में है तथा जो राम की मानता है वही धन्य व कुलभूषण हो जाता है । अस्तु अपने कुल का भूषण होना चाहते हैं तो राम को जानें और राम की मानें । अथ ! राम राम जय राम राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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